Varanasi मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उज्जैन के बाद अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में विश्व की अनूठी ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ स्थापित की गई है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस घड़ी के डिजिटल फलक पर प्रदर्शित हो रहे भारतीय पंचांग और नक्षत्रों की सटीक गणना की सराहना की है। यह घड़ी न केवल समय बताती है, बल्कि भारत की समृद्ध विरासत को डिजिटल युग में जीवंत भी करती है।
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Varanasi क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?
यह विश्व की प्रथम डिजिटल वैदिक घड़ी है, जिसे उज्जैन की ‘महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ’ द्वारा तैयार किया गया है।
- स्थापना: सर्वप्रथम इसे 29 फरवरी 2024 को उज्जैन में स्थापित किया गया था।
- काशी में आगमन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 3 अप्रैल 2026 को यह घड़ी यूपी के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी।
- आधार: यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित है, यानी जिस स्थान पर सूर्योदय का जो समय होगा, यह घड़ी उसी के अनुसार काल-गणना (मुहूर्त और नक्षत्र) प्रदर्शित करेगी।
Varanasi वैदिक समय प्रणाली: 24 घंटे नहीं, 30 मुहूर्त
इस घड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी काल-गणना पद्धति है, जो पश्चिमी ‘घंटा-मिनट’ की प्रणाली से भिन्न है:
- एक पूर्ण दिवस: एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बीच के समय को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है।
- विभाजन: दिन के 15 मुहूर्त (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात्रि के 15 मुहूर्त (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)।
- सूक्ष्म गणना: 1 मुहूर्त = 30 कला, 1 कला = 30 काष्ठा। (एक मुहूर्त सामान्यतः 48 मिनट का होता है, जो सूर्य के कोण के अनुसार बदलता रहता है)।
Varanasi डिजिटल फलक पर उपलब्ध जानकारी
यह घड़ी एक ‘स्मार्ट पंचांग’ की तरह कार्य करती है। इसके डिजिटल स्क्रीन पर एक साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां देखी जा सकती हैं:
- वैदिक एवं मानक समय: वैदिक समय के साथ-साथ भारतीय मानक समय (IST)।
- पंचांग विवरण: विक्रम संवत, मास, तिथि, नक्षत्र, योग और करण।
- खगोलीय स्थिति: सूर्य राशि, चंद्र राशि, ग्रहों की स्थिति और भद्रा की जानकारी।
- मुहूर्त: वर्तमान में चल रहे विशिष्ट मुहूर्त की जानकारी।





