Moradabad: पिंजरे में कैद हुई ‘खूनी’ मादा तेंदुआ; मासूम लव्यांश पर किया था जानलेवा हमला, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

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Moradabad

Report: Danveer

Moradabad उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कांठ तहसील क्षेत्र में बीते कई दिनों से दहशत का पर्याय बनी मादा तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के जाल में फंस गई है। सलेमपुर-फजलाबाद के जंगलों में लगाए गए पिंजरे में तेंदुए के कैद होने की खबर मिलते ही इलाके में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस तेंदुए ने हाल ही में एक मासूम बच्चे को अपना निवाला बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद से ही वन विभाग उसे पकड़ने के लिए प्रयासरत था।

Moradabad मासूम पर हमले के बाद बढ़ा था आक्रोश

दहशत की शुरुआत चार दिन पहले हुई थी, जब गांव फजलाबाद के रहने वाले 5 वर्षीय मासूम लव्यांश पर इस तेंदुए ने अचानक हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी रोष था और किसान खेतों पर जाने से डर रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने महदूद कलमी, मिश्रीपुर, दरियापुर और सलेमपुर-फजलाबाद के जंगलों में घेराबंदी कर कई पिंजरे लगाए थे।

Moradabad सुबह खेत पहुंचे किसानों ने दी सूचना

सोमवार सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे, तो उन्होंने सलेमपुर-फजलाबाद के जंगल में लगे पिंजरे के अंदर मादा तेंदुए को दहाड़ते हुए पाया। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन दरोगा राजेंद्र सिंह और अमरजीत सिंह के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। पुलिस और वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया और तेंदुए सहित पिंजरे को अपने कब्जे में लिया।

Moradabad स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भेजा गया ‘डियर पार्क’

पकड़ी गई मादा तेंदुए को मुरादाबाद स्थित डियर पार्क ले जाया गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार:

  • उम्र: मादा तेंदुए की उम्र लगभग 9 से 10 साल बताई जा रही है।
  • स्वास्थ्य: पशु चिकित्सकों की टीम उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है, जिसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उसे सुरक्षित प्राकृतिक वास (घने जंगल) में छोड़ा जाएगा।

Moradabad वन विभाग की अपील: अभी बरतें सावधानी

तेंदुए के पकड़े जाने से ग्रामीणों को राहत तो मिली है, लेकिन वन विभाग ने अभी भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने अपील की है कि किसान अभी भी खेतों पर अकेले जाने से बचें और छोटे बच्चों को सुनसान रास्तों या खेतों की तरफ न भेजें, क्योंकि क्षेत्र में अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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