Report: Ratan kumar
Jamtara झारखंड के जामताड़ा जिले में खेती-किसानी की एक नई इबारत लिखी जा रही है। नारायणपुर प्रखंड के गोकुला गांव की रहने वाली मुसर्रत खातून आज उन हजारों महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं, जो कुछ अलग करने का जज्बा रखती हैं। मुसर्रत ने वर्षों से चली आ रही धान और मकई की पारंपरिक खेती को छोड़ ‘स्ट्रॉबेरी’ उगाने का फैसला किया और आज वह पूरे क्षेत्र में ‘स्ट्रॉबेरी दीदी’ के नाम से मशहूर हो चुकी हैं।
Jamtara सखी मंडल ने दिखाई राह
मुसर्रत की इस सफलता के पीछे ‘झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी’ (JSLPS) का बड़ा योगदान रहा। वह ‘गुलाब आजीविका सखी मंडल’ की सदस्य बनीं, जहाँ उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला बल्कि खेती के आधुनिक तरीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया। JSLPS के प्रोत्साहन ने ही उन्हें जोखिम उठाकर कुछ नया करने की हिम्मत दी।
Jamtara कम जमीन, अधिक मुनाफा
जामताड़ा जैसे जिले में, जहाँ मुख्य रूप से धान की खेती होती है, वहां स्ट्रॉबेरी जैसी नगदी फसल (Cash Crop) उगाना आसान नहीं था। लेकिन मुसर्रत की मेहनत रंग लाई। आज उनके खेतों में लहलहाती लाल स्ट्रॉबेरी न केवल उनकी आय का मुख्य जरिया बनी है, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी इसकी भारी मांग है। इस पहल से मुसर्रत की आर्थिक स्थिति में पहले के मुकाबले कई गुना सुधार हुआ है।
Jamtara प्रेरणा का केंद्र बनीं मुसर्रत
मुसर्रत की यह कामयाबी अब गांव की सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्हें देखकर इलाके की अन्य महिलाएं और किसान भी अब नगदी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जिला प्रशासन और JSLPS भी मुसर्रत की इस पहल को सराहा रहे हैं, क्योंकि यह ग्रामीण स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल है।
“अगर सही ट्रेनिंग और संसाधन मिलें, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में बदलाव ला सकती हैं। मुसर्रत ने यह साबित कर दिया है कि जामताड़ा की मिट्टी अब स्ट्रॉबेरी जैसी हाई-वैल्यू फसलों के लिए भी तैयार है।”





