Report: Arvind Chouhan
Gwalior दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा के कार्यालय में एक बार फिर नाथूराम गोडसे की पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और डासना पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज विशेष रूप से सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग से लेकर यूजीसी के नियमों और वैश्विक युद्ध की स्थिति पर खुलकर अपनी राय रखी।
Gwalior सावरकर के सम्मान और भारत रत्न पर बोले पीठाधीश्वर
वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की उठ रही मांग पर पीठाधीश्वर ने कहा कि सावरकर जी का व्यक्तित्व इतना विशाल है कि उन्हें किसी सम्मान की आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें उचित सम्मान दे। उन्होंने कहा कि सावरकर जैसे राष्ट्रभक्तों को सम्मानित करना देश का गौरव बढ़ाने जैसा है।
Gwalior यूजीसी के नियमों को बताया ‘काला कानून’
यति नरसिंहानंद गिरी ने यूजीसी (UGC) के हालिया घटनाक्रमों और नियमों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ करार देते हुए कहा कि यह सामान्य वर्ग के बच्चों को जन्मजात अपराधी घोषित करने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी कि वे इसका हर संभव विरोध करेंगे और यदि यह पूरी तरह लागू हुआ, तो देश गृह युद्ध की स्थिति में जा सकता है।
Gwalior मिडिल ईस्ट संकट और इजराइल का जिक्र
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव पर बात करते हुए पीठाधीश्वर ने इजराइल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इजराइल जैसा छोटा देश ईरान जैसे देशों के खिलाफ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा, “जो लड़ाई इजराइल वहां जमीन पर लड़ रहा है, वही लड़ाई हम भारत में वैचारिक स्तर पर लड़ रहे हैं।” उनके इस बयान ने एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।
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