Report: Ratan kumar
Jamtara झारखंड के जामताड़ा जिले के नारायणपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में 11वीं कक्षा की छात्रा छामोली टुडू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद हड़कंप मच गया है। छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर इलाज न मिलने और विद्यालय प्रबंधन की कथित संवेदनहीनता को लेकर ग्रामीणों और परिजनों ने नारायणपुर थाने के बाहर जमकर हंगामा किया। मामले के तूल पकड़ते ही राज्य के मंत्री इरफान अंसारी मौके पर पहुँचे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
Jamtara “भाई को गेट पर रोका, बहन ने तोड़ दिया दम” – परिजनों का गंभीर आरोप
Jamtara कुमार पहाड़ी निवासी वीर टुडू की पुत्री छामोली की मौत ने विद्यालय की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
- मिलने की पाबंदी: मृतका के भाई का आरोप है कि वह शनिवार सुबह 11 बजे अपनी बहन से मिलने स्कूल पहुँचा था, लेकिन उसे गेट पर ही रोक दिया गया।
- इलाज में देरी: परिजनों का दावा है कि छात्रा सुबह से बीमार थी, लेकिन वार्डन और प्रबंधन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय मामले को दबाते रहे। जब स्थिति बेहद नाजुक हो गई, तब उसे निजी वाहन से नारायणपुर अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उपचार के कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।
Jamtara मंत्री इरफान अंसारी की सख्त कार्रवाई: वार्डन पर गिरेगी गाज
घटना की सूचना मिलते ही मंत्री इरफान अंसारी नारायणपुर थाना पहुँचे और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया।
- निलंबन का निर्देश: मंत्री ने मौके पर ही दोषी वार्डन पारुल मांझी और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ तत्काल निलंबन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
- जांच कमेटी: अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अनंत कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की गई है, जो पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच करेगी। रविवार को छात्रा के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट जांच का मुख्य आधार बनेगी।
Jamtara पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे और रोजगार का ऐलान
दुख की इस घड़ी में मंत्री ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए कई बड़ी घोषणाएं की हैं।
- आर्थिक सहायता: मृतका के परिजनों को सरकारी आवास, पेंशन और तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
- नौकरी का आश्वासन: मंत्री ने मृतक छात्रा के भाई को विभाग में रोजगार दिलाने का भी भरोसा दिया। इस दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्हें व्यवस्थाओं में सुधार के कड़े निर्देश दिए गए हैं।





