Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विजयपुर सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। इसके बाद उपचुनाव में दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को निर्वाचित घोषित किया गया है।
फैसले की घोषणा जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने की। अदालत ने कहा कि मल्होत्रा ने जानबूझकर मतदाताओं को गुमराह किया और अधूरी जानकारी दी, इसलिए उनका निर्वाचन रद्द करना आवश्यक था। हालांकि, हाईकोर्ट ने फैसले पर अमल 15 दिन के लिए रोक दी है।
Madhya Pradesh: मल्होत्रा का बचाव और कोर्ट की खारिज दलील
मुकेश मल्होत्रा ने दावा किया कि हलफनामे में जानकारी छुपना सद्भावना की गलती थी। उन्होंने गवाही में नामांकन फॉर्म भरने वाले जेपी धनोपिया पर जिम्मेदारी डाली और कहा कि सभी तथ्य उनके द्वारा साझा किए गए थे।
हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि मल्होत्रा सामाजिक विज्ञान में एमए और एलएलबी धारक हैं, इसलिए यह दावा कि उन्हें आरोपों की गंभीरता का ज्ञान नहीं था, स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि उन्होंने फॉर्म भरने वाले को गवाह के रूप में पेश नहीं किया और हलफनामे पर सत्यता की घोषणा बिना पढ़े हस्ताक्षर करना विश्वसनीय नहीं है।
Madhya Pradesh: पिछला चुनाव और वोट प्रतिशत
नवंबर 2024 में हुए विजयपुर उपचुनाव में रावत को मल्होत्रा ने 7,364 वोटों से हराया था। रावत उस समय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।
रामनिवास रावत ने कोर्ट को बताया कि मल्होत्रा ने हलफनामे में आपराधिक मामलों की अधूरी जानकारी दी, जो कि भ्रष्ट आचरण के अंतर्गत आता है। चुनाव में विजयी प्रत्याशी को 50.66% और उन्हें 46.95% वोट मिले थे। अन्य प्रत्याशियों को कुल 2.39% वोट प्राप्त हुए।
Madhya Pradesh: कोर्ट ने फैसले के तीन कानूनी और नैतिक आधार बताए
- मतदाताओं का अधिकार: लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता को उम्मीदवार की आपराधिक पृष्ठभूमि जानने का मौलिक अधिकार होता है, ताकि वह सही निर्णय ले सके।
- अनुचित प्रभाव: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) के तहत, महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालने के समान है और यह चुनावी भ्रष्ट आचरण माना जाता है।
- स्थानीय भौतिक तथ्यों का महत्व: विजयपुर एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां पेड़ों को पूजा जाता है। मल्होत्रा ने हलफनामे में 210 पेड़ों को काटने की सजा छुपाई, जो मामूली गलती नहीं मानी जा सकती और यह वोटर्स के निर्णय को प्रभावित करती है।





