BY
Yoganand Shrivastava
Delhi पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और हवाई हमलों के बीच पुणे के एक नामचीन स्कूल का ‘स्टडी टूर’ संकट में घिर गया है। जानकारी के अनुसार, स्कूल के 80 छात्र और 4 शिक्षक इस समय दुबई में मौजूद हैं, जहाँ ईरान द्वारा किए जा रहे मिसाइल हमलों के कारण हवाई यातायात बाधित हो गया है। भारत सरकार का विदेश मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय संयुक्त रूप से इन सभी को सुरक्षित स्वदेश लाने की कोशिशों में जुट गया है।
स्टडी विजिट पर गया था दल, स्कूल ने की धैर्य रखने की अपील
Delhi पुणे का यह शैक्षणिक दल दुबई की ‘स्टडी विजिट’ के लिए गया था, लेकिन इसी दौरान क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
- सभी सुरक्षित: स्कूल प्रशासन और स्थानीय दूतावास ने पुष्टि की है कि सभी 84 सदस्य सुरक्षित स्थान पर हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।
- अभिभावकों को आश्वासन: स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे पैनिक न करें। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है और जैसे ही हवाई मार्ग सुरक्षित होगा, विशेष विमान के जरिए छात्रों की वापसी सुनिश्चित की जाएगी।
ईरान का पलटवार: आखिर दुबई को क्यों बनाया निशाना?
Delhi विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान का यूएई (दुबई) के साथ कोई सीधा क्षेत्रीय विवाद नहीं है, लेकिन यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों का परिणाम है।
- जवाबी हमला: 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है।
- अमेरिकी ठिकानों पर प्रहार: दुबई समेत पूरे यूएई में ‘अल-धफ्रा’ जैसे कई महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। ईरान इन देशों को अमेरिकी सहयोगी मानकर दबाव बनाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दाग रहा है। यूएई रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अब तक सैकड़ों मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया है, लेकिन इनके मलबे से शहर में तनाव और भय का माहौल है।
Delhi क्षेत्रीय अस्थिरता और भारतीय मिशन की भूमिका
Delhi ईरान ने केवल दुबई ही नहीं, बल्कि कतर, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे उन सभी देशों को निशाने पर लिया है जहाँ अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। इस अनिश्चितता के माहौल में भारतीय मिशन अपनी भूमिका मुस्तैदी से निभा रहा है।
- मंत्रालयों की तत्परता: विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निर्देश पर दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास छात्रों के दल के साथ सीधा संपर्क बनाए हुए है।
- भविष्य की रणनीति: सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि क्या छात्रों को सड़क मार्ग से किसी सुरक्षित पड़ोसी देश ले जाकर वहाँ से एयरलिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल, छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने होटल या सुरक्षित आश्रयों से बाहर न निकलें और स्थानीय सुरक्षा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
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