BY
Yoganand Shrivastava
Stag beetle आमतौर पर कीड़े-मकोड़ों को तुच्छ समझा जाता है, लेकिन ‘स्टैग बीटल’ के मामले में यह बात बिल्कुल उलटी है। दुर्लभ प्रजाति का यह कीड़ा अपनी विशिष्ट बनावट और औषधीय गुणों के कारण दुनिया का सबसे महंगा कीट माना जाता है। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक पहुँच जाती है।

पहचान और अनोखी शारीरिक बनावट
Stag beetle स्टैग बीटल की सबसे बड़ी पहचान इसके सिर पर निकले हुए सींग जैसे जबड़े हैं, जो दिखने में हिरण के सींगों (Antlers) की तरह लगते हैं। ‘लुकानिडे’ परिवार से ताल्लुक रखने वाला यह कीड़ा लगभग 2 से 3 इंच लंबा होता है। इसका शरीर चमकदार काला होता है, जबकि पंख भूरे रंग के होते हैं। नर स्टैग बीटल अपने बड़े जबड़ों का इस्तेमाल काटने के लिए नहीं, बल्कि दूसरे नरों को डराने या कुश्ती लड़ने के लिए करते हैं।

लाखों की कीमत और दुर्लभता का कारण
Stag beetle इस कीड़े की कीमत इतनी अधिक क्यों है? इसका मुख्य कारण इसकी दुर्लभता और इससे बनने वाली दवाइयां हैं। कई देशों में इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। कुछ साल पहले एक जापानी ब्रीडर ने अपना एक स्टैग बीटल लगभग 65 लाख रुपये में बेचा था, और अब इसकी दुर्लभ प्रजातियों की मांग करोड़ों में है। यह कीड़ा मुख्य रूप से सड़ी हुई लकड़ियों, पेड़ों के रस और फलों के मीठे रस पर जीवित रहता है।

रहस्यमयी जीवनचक्र: लार्वा से एडल्ट तक का सफर
Stag beetle स्टैग बीटल का जीवनकाल काफी दिलचस्प होता है। एक वयस्क (Adult) बनने के बाद यह केवल कुछ महीनों तक ही जीवित रहता है, लेकिन इसका अधिकांश जीवन लार्वा के रूप में बीतता है। यह 3 से 7 साल तक ज़मीन के नीचे लार्वा अवस्था में रहता है। इन्हें गर्म वातावरण पसंद होता है; अत्यधिक ठंड इनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है, यही कारण है कि ये अक्सर खाद के ढेर या गर्म लकड़ी के लट्ठों के नीचे शरण लेते हैं।





