Indore : मानवता की मिसाल: लावारिस शवों को सम्मानजनक अंतिम विदाई

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Indore

Report: Devendra Jaiswal

परिजनों की प्रतीक्षा के बाद अंतिम संस्कार

Indore लावारिस शव मिलने की स्थिति में पुलिस या अस्पताल पहले तीन से चार दिनों तक परिजनों की तलाश करता है। इस दौरान पहचान से जुड़ी हर संभव कोशिश की जाती है। जब कोई दावा सामने नहीं आता, तब शव का अंतिम संस्कार सम्मान और मर्यादा के साथ कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

इंदौर में सामाजिक संस्था निभा रही अहम भूमिका

Indore इंदौर में एक स्वयंसेवी संस्था मानवता के नाते लावारिस शवों को अंतिम गति प्रदान कर रही है। धर्म के अनुसार हिंदू शवों का दाह संस्कार और मुस्लिम शवों को दफन किया जाता है। यह कार्य पूरी तरह निःशुल्क होता है, ताकि हर व्यक्ति को अंतिम संस्कार का अधिकार और सम्मान मिल सके।

निष्ठा से सेवा में जुटे स्वयंसेवक

Indore इस सेवा कार्य में जययू जोशी, करीम पठान, सुरेश मोरे, फिरोज पठान, अजय नागदा और आदिल शेख जैसे सदस्य पूरी लगन और समर्पण के साथ लगे हुए हैं। उनका उद्देश्य केवल यही है कि किसी भी लावारिस आत्मा को बिना सम्मान के न छोड़ा जाए और समाज में इंसानियत की भावना जीवित रहे।

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