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Brij Bhushan Youth Vision: राष्ट्रकथा महोत्सव के तीसरे दिन 4 जनवरी को अयोध्या में बृज भूषण शरण सिंह की युवा विकास सोच रही केंद्र में

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On the third day of the Rashtrakatha Mahotsav, January 4, in Ayodhya, Brij Bhushan Sharan Singh’s vision for youth development remained at the center of focus.

Brij Bhushan Youth Vision: अयोध्या में आयोजित दिव्य ऐतिहासिक राष्ट्रकथा महोत्सव के अंतर्गत 4 जनवरी को राम कथा का तीसरा दिन श्रद्धा, विचार और युवाओं के मार्गदर्शन के संदेश के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन अयोध्या स्थित प्रक्षेत्र नंदिनी निकेतन में लगातार जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ रहा है।

Brij Bhushan Youth Vision: बांके बिहारी से अवध बिहारी तक की दिव्य यात्रा” पर आधारित

राम कथा के तीसरे दिन कथा का स्वर और अधिक गंभीर और चिंतनशील दिखाई दिया। महोत्सव की केंद्रीय भावना “बांके बिहारी से अवध बिहारी तक की दिव्य यात्रा” पर आधारित है, जिसमें भक्ति से आगे बढ़कर अनुशासित जीवन, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों को प्रमुखता से रखा जा रहा है। विशेष रूप से युवाओं को जीवन में सही दिशा और संतुलन का संदेश देने पर जोर दिया गया।

Brij Bhushan Youth Vision

कथा का वाचन परम पूज्य सद्गुरु श्री रितेश्वर महाराज द्वारा किया जा रहा है। तीसरे दिन उनके प्रवचन में रामकथा के प्रसंगों के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि विवेक, मर्यादा और आत्मसंयम ही जीवन की सच्ची शक्ति हैं। उनकी सरल और सहज शैली ने युवाओं सहित सभी आयु वर्ग के श्रोताओं को कथा से गहराई से जोड़े रखा।

इस अवसर पर बृज भूषण शरण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति भी बनी रही। आयोजकों के अनुसार उनका जुड़ाव आयोजन को संरचित दिशा देने वाला है, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक विमर्श को युवाओं के चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना से जोड़ना है। पूरे कार्यक्रम में दिखावे के बजाय विषय की गंभीरता और निरंतरता को प्राथमिकता दी जा रही है।

राम कथा के दौरान मनोज सिन्हा, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, भी प्रक्षेत्र नंदिनी निकेतन पहुँचे। उन्होंने अन्य विशिष्ट अतिथियों और श्रद्धालुओं के साथ राम कथा का श्रवण किया। उनकी उपस्थिति से आयोजन को एक व्यापक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक संदर्भ भी प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में प्रतीक भूषण सिंह और करण भूषण सिंह की उपस्थिति भी दर्ज की गई, जिससे आयोजन में सहभागिता और निरंतरता का भाव और सुदृढ़ हुआ।

महोत्सव की अवधि में दो महत्वपूर्ण तिथियाँ भी शामिल हैं। 5 जनवरी को परम पूज्य सद्गुरु श्री रितेश्वर महाराज का जन्मदिन और 8 जनवरी को बृज भूषण शरण सिंह का जन्मदिन पड़ रहा है। आयोजकों के अनुसार इन तिथियों को अलग से भव्य रूप न देकर, राम कथा के स्वाभाविक प्रवाह में ही सादगीपूर्वक समाहित किया जाएगा।

व्यवस्थाओं की दृष्टि से प्रक्षेत्र नंदिनी निकेतन में बैठने, ध्वनि व्यवस्था और संचालन को इस प्रकार तैयार किया गया है कि श्रोताओं को बिना किसी व्यवधान के कथा श्रवण का अनुभव मिल सके।

भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में आयोजित यह महोत्सव परंपरा और वर्तमान विचारधारा के संगम के रूप में उभर रहा है। 4 जनवरी को राम कथा के तीसरे दिन की समाप्ति के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रकथा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं को जीवन मूल्यों से जोड़ने वाला एक व्यापक सांस्कृतिक प्रयास है।