Dehli news: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस की ‘वोट चोर, गद्दी छोड़ो’ रैली के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। रामलीला मैदान में हुई इस रैली में कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखे आरोप लगाए, जिसके जवाब में सत्तारूढ़ दल ने भी कड़ा पलटवार किया। बीजेपी प्रवक्ताओं ने नेहरू परिवार की तुलना मुगल वंश से करते हुए कांग्रेस के भविष्य पर सवाल उठाए।
रैली से पहले दावे, मंच पर सिर्फ कांग्रेस
करीब एक महीने की तैयारी के बाद आयोजित इस रैली को लेकर कांग्रेस ने पांच करोड़ हस्ताक्षरों के साथ आने का दावा किया था। हालांकि, मंच पर केवल कांग्रेस के नेता ही नजर आए। आईएनडीआई गठबंधन के किसी भी सहयोगी दल को आमंत्रित नहीं किया गया, जिसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज रहीं।
राहुल गांधी का भाषण और ‘तीन दुश्मन’
रैली में राहुल गांधी ने अपने 14 मिनट के भाषण में कांग्रेस के तीन कथित दुश्मनों के नाम गिनाए—नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मोहन भागवत। इस दौरान भाषण में आक्रामक तेवर दिखे और कुछ कार्यकर्ताओं की नारेबाजी ने विवाद खड़ा कर दिया।
विवादित नारे और बीजेपी की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। इस पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा से कांग्रेस की मानसिकता उजागर होती है।
मुगल वंश से तुलना, ‘द लास्ट मुगल’ का जिक्र
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का भविष्य वही हो सकता है, जैसा मुगल साम्राज्य का अंत हुआ था। उन्होंने ‘द लास्ट मुगल’ पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे छठी पीढ़ी के बाद मुगल शासन का पतन हुआ, वैसे ही कांग्रेस भी नेहरू परिवार की पीढ़ियों के बाद समाप्ति की ओर बढ़ रही है।
नेहरू परिवार की पीढ़ियों का हवाला
बीजेपी प्रवक्ता के अनुसार, कांग्रेस में अब तक मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी का प्रभाव रहा है, जबकि राहुल गांधी छठी पीढ़ी के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं। उनका दावा है कि इसी क्रम के बाद कांग्रेस का राजनीतिक प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
सियासी बयानबाजी तेज
रामलीला मैदान की रैली के बाद से कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर आक्रामक आरोप लगा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।





