BY: Yoganand Shrivastva
Dehli: संसद के शीतकालीन सत्र में ई-सिगरेट एक बार फिर बहस का बड़ा मुद्दा बन गया। भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद पर सदन के भीतर ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया, जिसके बाद जोरदार हंगामा हुआ। इस विवाद के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि ई-सिगरेट आखिर है क्या, यह कितनी नुकसानदेह है और भारत ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित क्यों किया है।
भारत में ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध
केंद्र सरकार ने कई वर्ष पहले ही ई-सिगरेट के निर्माण, बिक्री, वितरण और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा करते हुए बताया था कि यह प्रतिबंध स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है।
20 मई 2019 को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, जिसमें ई-सिगरेट को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बताते हुए तत्काल प्रतिबंध की सलाह दी गई थी। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया था कि नई पीढ़ी ई-सिगरेट को सुरक्षित मानकर इसके उपयोग की ओर झुक रही है, जबकि यह सामान्य सिगरेट जितनी ही हानिकारक है।
क्या होती है ई-सिगरेट और कैसे नुकसान पहुंचाती है?
- ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर है, जिसमें निकोटिन या अन्य रसायनों वाला लिक्विड भरा जाता है।
- बैटरी की मदद से यह लिक्विड गर्म होकर भाप में बदलता है, जिसे उपयोगकर्ता इनहेल करता है।
- कई बार इस लिक्विड में निकोटिन की मात्रा सामान्य सिगरेट से भी अधिक पाई जाती है, जिससे लत और स्वास्थ्य जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।
- शोध में पाया गया है कि ई-सिगरेट अस्थमा, फेफड़ों में सूजन, पॉपकॉर्न लंग्स जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
- इसके लगातार उपयोग से फेफड़ों के कैंसर जैसे खतरे भी बढ़ जाते हैं।
- कई देशों ने इसके बढ़ते दुष्प्रभावों और मौत के मामलों को देखते हुए इसे प्रतिबंधित किया है। भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है जहाँ ई-सिगरेट पर पूर्ण बैन लागू है।
ई-सिगरेट पीने पर सजा का प्रावधान
सरकार ने इसके उपयोग और बिक्री पर कड़े दंड का प्रावधान किया है—
- पहली बार उल्लंघन करने पर अधिकतम 1 लाख रुपये जुर्माना और एक वर्ष तक की कैद या दोनों।
- दूसरी बार पकड़े जाने पर सजा बढ़कर 5 लाख रुपये जुर्माना और तीन वर्ष तक की कैद हो सकती है।
- यह प्रावधान ई-हुक्का पर भी समान रूप से लागू होता है।
भारत सरकार का मानना है कि ई-सिगरेट युवाओं को तेजी से लत की ओर ले जा रही थी और इसके गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभाव आने वाले समय में बड़ी स्वास्थ्य आपदा का कारण बन सकते थे। इसी वजह से इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है।





