concept: rp shriwastav, by: vijay nandan
पटना: बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से पहले चरण में 121 सीटों पर आज शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ। बिहार के चुनावी इतिहास को देखें तो 25 साल बाद मतदाताओं ने दिल खोलकर कर लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लिया है। पहले चरण की वोटिंग के दौरान ग्राउंड जीरो पर हमारे संवाददाताओं ने चुनाव के रुख का गुणा भाग किया तो सबसे चौंकाने वाले संकेत सामने आए हैं. चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक शाम 5 बजे तक वोटिंग का आंकड़ा 60 प्रतिशत से ऊपर है, लेकिन माना जा रहा है कि पहले चरण में मतदान का प्रतिशत 65 फीसदी को क्रास कर जाएगा। खास बात ये है कि पहले चरण में पोलिंग बूथ के बाहर लंबी-लंबी कतारों में बढ़चढ़ कर महिलाओं को अपनी बारी का इंतजार करते देखा गया। ये संकेत बिहार के चुनाव परिणाम की दशा और दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

कतार में बारी का इंतजार करते देखे गए युवा
मुजफ्फरपुर जिले में पहली बार युवाओं में मतदान के प्रति जबरदस्त उत्साह देखा गया। इसी तरह से अन्य जिलों के पोलिंग बूथ पर भी युवाओं की लंबी-लंबी लाइन देखी गई। जिससे मतदान के प्रतिशत में इजाफा हुआ है।
गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने बढ़त हासिल करते हुए एनडीए की 55 सीटों के मुकाबले 63 सीटें हासिल की थी, लेकिन क्या इस बार महागठबंधन पिछली सफलता को दोहरा पाएगी ये 14 नवंबर को साफ होगा। क्या इस बार के चुनाव में इतिहास खुद को दोहरा पाएगा ये भी सवाल है, क्योंकि पटना समेत जिन विधानसभा सीटों पर आज मतदान हुआ है, वो सीटें अक्सर बिहार की राजनीति की दशा और दिशा तय करती रही हैं। पहले चरण में कई मंत्रियों के साथ-साथ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और आरजेडी से अलग हुए उनके भाई तेज प्रताप की किस्मत भी तय होगी तो वहीं चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) की जन सुराज पार्टी को इस चुनाव में बड़ा फैक्टर बताया जा रहा है, क्या वो कोई कमाल दिखा पाएंगे, ये भी देखना होगा। पहले चरण की मुख्य सीटों में राघोपुर सीट भी शामिल है, जहां पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे आरजेडी नेता तेजस्वी यादव हैट्रिक लगाने की उम्मीद कर रहे हैं तो वहीं तारापुर सीट से उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी भी जीत की आस लगाए बैठे हैं।

वादे बनें मतदाताओं के इरादे या आधी आबादी को रोजगार गारंटी
इस चुनाव में लोकलुभावन वादे चलेंगे या फिर एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई, विकास योजनाओं का जादू चलेगा ये देखना भी दिलचस्प होगा। एनडीए ने महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपए देने का मास्टर स्ट्रोक पहले ही खेल दिया है। क्या पहले चरण के मतदान में महिलाओं के अधिक से अधिक संख्या में वोटिंग में हिस्सा लेना, इस योजना का सकारात्मक संकेत है। युवाओं का मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना क्या रोजगार के मुद्दे की तरफ इशारा है, लेकिन इन बड़े संकेतों पर और चुनाव प्रचार में उछाले जा रहे तमाम मुद्दों पर मुहर तो 14 नवंबर को ही लगेगी, जब बिहार के चुनाव परिणाम सामने आएंगे।





