Kartik Purnima Ki Katha: कैसे भगवान शिव बने त्रिपुरारी, जानें कार्तिक पूर्णिमा की पावन कथा

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Kartik Purnima Ki Katha: कैसे भगवान शिव बने त्रिपुरारी, जानें कार्तिक पूर्णिमा की पावन कथा

कार्तिक पूर्णिमा का दिन सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन भगवान शिव और श्री हरि विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या देव दीपावली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दीपदान और स्नान-दान का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।

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भगवान शिव बने त्रिपुरारी त्रिपुरासुर वध की कथा
पुराणों के अनुसार, प्राचीन काल में त्रिपुरासुर नामक एक राक्षस था जो तीन नगरों (त्रिपुर) का स्वामी था। उसे भगवान ब्रह्मा से वरदान मिला था कि उसका वध केवल वही कर सकेगा जो उसके तीनों नगरों को एक साथ नष्ट कर सके। इस वरदान के बल पर उसने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया।
देवता त्राहि-त्राहि कर उठे और भगवान शिव से प्रार्थना की। तब महादेव ने अपना दिव्य धनुष उठाया और एक ही बाण से तीनों नगरों को एक साथ नष्ट कर त्रिपुरासुर का अंत कर दिया।
इसी कारण भगवान शिव को त्रिपुरारी कहा गया और यह दिन त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था। इस अवतार में उन्होंने पृथ्वी को जलप्रलय से बचाया और सभी प्राणियों की रक्षा की। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की आराधना का भी विशेष महत्व है।

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