by: vijay nandan
धनतेरस, दीपावली पर्व की शुरुआत का पहला दिन माना जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं, सोना-चांदी खरीदी जाती है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि धनतेरस केवल धन की देवी लक्ष्मी का ही नहीं, बल्कि आयु और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि का भी दिन है।

भगवान धन्वंतरि कौन हैं?
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि विष्णु के अवतार माने जाते हैं। समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों ने अमृत निकालने के लिए क्षीर सागर को मथा, तब सबसे पहले धन्वंतरि देव अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उन्हें देवताओं का चिकित्सक (वैद्यराज) कहा जाता है। आयुर्वेद की उत्पत्ति इन्हीं से मानी जाती है। यही कारण है कि धनतेरस को ‘धन्वंतरि जयंती’ भी कहा जाता है। ‘धन’ शब्द का अर्थ केवल पैसे या सोने से नहीं, बल्कि आरोग्य, सुख और समृद्धि से भी है। भगवान धन्वंतरि ने मनुष्य को स्वस्थ रहने का ज्ञान दिया, इसलिए यह दिन स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक है। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा से यह माना जाता है कि व्यक्ति को दीर्घ जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।

लक्ष्मी पूजा और धन्वंतरि आराधना का समन्वय
धनतेरस की शाम को जहां माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, वहीं भगवान धन्वंतरि की आराधना भी साथ की जाती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि
“आरोग्यं परमं भाग्यं, स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्।”
अर्थात् बिना स्वास्थ्य के कोई भी सुख या संपत्ति सार्थक नहीं होती।
इसलिए पहले स्वास्थ्य (धन्वंतरि) की, फिर समृद्धि (लक्ष्मी) की आराधना की जाती है।
‘यमदीपदान’ की परंपरा, अकाल मृत्यु से रक्षा का प्रतीक
धनतेरस की रात ‘यमदीपदान’ की विशेष परंपरा निभाई जाती है।
इस दिन शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है और यमराज से प्रार्थना की जाती है कि परिवार को अकाल मृत्यु का भय न हो। यह दीप दीर्घायु और आरोग्य की कामना का प्रतीक है जो धन्वंतरि देव की कृपा से ही संभव है।
आधुनिक युग में धन्वंतरि की प्रासंगिकता
आज जब लोग स्वास्थ्य समस्याओं, प्रदूषण और तनाव से जूझ रहे हैं, तब भगवान धन्वंतरि की पूजा का अर्थ और भी गहरा हो गया है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि असली धन सोना-चांदी नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर और मन है। धनतेरस केवल खरीदारी का दिन नहीं है, यह स्वास्थ्य, आयु और समृद्धि के संतुलन का पर्व है। भगवान धन्वंतरि की आराधना से न केवल तन, बल्कि मन भी स्वस्थ होता है और यही दीपावली की सच्ची शुरुआत है।





