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Princess Suriratna Ayodhya : अयोध्या से दक्षिण कोरिया, 2000 साल पुरानी एक अलौकिक अमर प्रेम कहानी

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Princess Suriratna Ayodhya to south korea

Princess Suriratna Ayodhya : इतिहास की किताबों में अक्सर युद्धों और संधियों के किस्से मिलते हैं, लेकिन भारत की धरती पर एक ऐसी कहानी भी मौजूद है जो समुद्र पार कर सात समंदर दूर एक नए वंश की जननी बनी। यह कहानी है अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना की, जिन्होंने आज से करीब दो हजार साल पहले अयोध्या से दक्षिण कोरिया तक का सफर तय किया और वहां की महारानी ‘हौ ह्वांग-ओक’ के रूप में अमर हो गईं।

Princess Suriratna Ayodhya : सपनों का आदेश और साहस भरा सफर

इस प्राचीन गाथा की शुरुआत सन 48 ईस्वी में होती है। दक्षिण कोरियाई ग्रंथ ‘सामगुक युसा’ के अनुसार, राजकुमारी सूरीरत्ना के पिता (अयोध्या के राजा) को एक दिव्य स्वप्न आया था। स्वप्न में ईश्वर ने उन्हें आदेश दिया कि वे अपनी 16 वर्षीय पुत्री को सुदूर पूर्व में स्थित ‘गाया’ (Kaya) राज्य भेजें, ताकि उनका विवाह वहां के राजा किमु सु-रो से हो सके।

Princess Suriratna Ayodhya to south korea

उस दौर में 4500 किलोमीटर से अधिक की समुद्री यात्रा करना किसी दुस्साहस से कम नहीं था। लेकिन पिता की आज्ञा और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास के साथ राजकुमारी एक विशाल नाव पर सवार होकर निकल पड़ीं। कहा जाता है कि समुद्र की लहरों को शांत रखने के लिए वे अपने साथ अयोध्या की सरयू नदी के पत्थर भी ले गई थीं।

Princess Suriratna Ayodhya : राजकुमारी से ‘महारानी हौ’ बनने का सफर

महीनों की कठिन यात्रा के बाद राजकुमारी कोरिया के तट पर पहुंचीं। वहां राजा किम सु-रो ने उनका भव्य स्वागत किया। राजकुमारी सूरीरत्ना ने राजा को बताया कि वे ‘अयुता’ (अयोध्या) राज्य की राजकुमारी हैं। राजा और राजकुमारी का विवाह हुआ और सूरीरत्ना वहां महारानी हौ ह्वांग-ओक के नाम से जानी गईं।

Princess Suriratna Ayodhya to south korea

इस विवाह ने केवल दो व्यक्तियों को नहीं, बल्कि दो महान संस्कृतियों को जोड़ दिया। महारानी हौ और राजा किम सु-रो के 12 बच्चे हुए। माना जाता है कि आज दक्षिण कोरिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 10% या 60 लाख लोग), जिसमें ‘काराक’ वंश के लोग शामिल हैं, जो खुद को महारानी हौ और राजा किम सु-रो का वंशज मानता है। कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति किम दाए-जुंग और पूर्व प्रधानमंत्री किम जोंग-पिल भी इसी वंश से ताल्लुक रखते थे।

Princess Suriratna Ayodhya : अयोध्या: दक्षिण कोरिया का ‘ननिहाल’

आज भी कोरिया के लोग अयोध्या के प्रति एक विशेष श्रद्धा भाव रखते हैं। उनके लिए अयोध्या केवल एक प्राचीन भारतीय शहर नहीं, बल्कि उनका ‘ननिहाल’ है। हर साल बड़ी संख्या में दक्षिण कोरियाई पर्यटक और ‘काराक’ वंश के लोग महारानी हौ के मायके यानी अयोध्या आते हैं।

Princess Suriratna Ayodhya to south korea

अयोध्या में सरयू नदी के तट पर महारानी हौ ह्वांग-ओक स्मारक पार्क बनाया गया है। यह पार्क न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच अटूट मित्रता का प्रतीक भी है। पार्क की वास्तुकला और वहां स्थापित पत्थर कोरियाई संस्कृति की झलक पेश करते हैं, जो हमें उस प्राचीन संबंध की याद दिलाते हैं।

Princess Suriratna Ayodhya : कूटनीतिक और सांस्कृतिक महत्व

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह ऐतिहासिक रिश्ता भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) का एक मजबूत आधार है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों के अलावा, यह भावनात्मक जुड़ाव कूटनीति को एक मानवीय चेहरा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई प्रथम महिला किम जोंग-सुक ने भी इस साझा विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रमों में शिरकत की है।

राजकुमारी सूरीरत्ना की यह कहानी हमें बताती है कि प्राचीन काल में भी भारतीय संस्कृति का विस्तार कितना व्यापक था। यह महज एक लोककथा नहीं, बल्कि दो सभ्यताओं के मिलन का जीवंत प्रमाण है। अयोध्या से कोरिया तक फैला यह रिश्ता हमें सिखाता है कि दूरियां चाहे कितनी भी हों, संस्कृति और भावनाओं के सेतु उन्हें पाट ही देते हैं।

जब भी हम सरयू की लहरों को देखते हैं, तो वे हमें उस साहसी राजकुमारी की याद दिलाती हैं जिसने दो हजार साल पहले वैश्विक संबंधों की एक ऐसी नींव रखी थी, जो आज भी अडिग है।

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