By- Vijay Yadav
Acharya Vagbhata Ayurveda : आयुर्वेद में ऋतुओं के अनुसार खान-पान और जीवनशैली को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। महान आयुर्वेदाचार्य आचार्य वाग्भट ने अपने ग्रंथ अष्टांग हृदयम् में स्पष्ट कहा है कि यदि मनुष्य मौसम के अनुसार आहार-विहार अपनाए तो अनेक रोगों से बचा जा सकता है। उन्होंने वर्षा, शीत और ग्रीष्म ऋतु के लिए अलग-अलग नियम बताए हैं। सबसे पहले वर्षा ऋतु का विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि इस समय शरीर की पाचन शक्ति सबसे अधिक प्रभावित होती है।
Acharya Vagbhata Ayurveda : वर्षा ऋतु में क्यों बिगड़ती है पाचन शक्ति?
आचार्य वाग्भट के अनुसार गर्मी के बाद जब वर्षा ऋतु आती है, तब शरीर में वात दोष बढ़ जाता है और अग्नि यानी पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है। यही कारण है कि बारिश के दिनों में भारी भोजन, तला-भुना खाना और अधिक मात्रा में भोजन करने से गैस, अपच, पेट दर्द, दस्त और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

उन्होंने सलाह दी है कि वर्षा ऋतु में हल्का, सुपाच्य और गर्म भोजन करना चाहिए। मूंग की दाल, पतली खिचड़ी, पुराना चावल, जौ, गेहूं और सूप जैसे खाद्य पदार्थ इस मौसम में लाभकारी माने गए हैं।
Acharya Vagbhata Ayurveda : बारिश में हरी पत्तीदार सब्जियां क्यों नहीं खानी चाहिए?
आयुर्वेद में वर्षा ऋतु के दौरान हरी पत्तीदार सब्जियों का सेवन कम करने की सलाह दी गई है। इसका कारण यह बताया गया है कि इस मौसम में नमी और कीटाणुओं की वृद्धि अधिक होती है। पत्तेदार सब्जियों में छोटे कीड़े, फफूंद और दूषित जल के अंश होने की संभावना बढ़ जाती है, जो पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पालक, मेथी, चौलाई जैसी पत्तेदार सब्जियों का सेवन सीमित मात्रा में और अच्छी तरह धोकर ही करना चाहिए।
Acharya Vagbhata Ayurveda : वात, पित्त और कफ को संतुलित रखने के उपाय
वर्षा ऋतु में तीनों दोषों को संतुलित रखने के लिए आयुर्वेद निम्न सुझाव देता है
हल्का और गर्म भोजन करें।
भोजन में अदरक, काली मिर्च, जीरा और हींग का उपयोग बढ़ाएं।
बासी और फ्रिज में रखा भोजन न खाएं।
अधिक दही, ठंडे पेय और तली हुई चीजों से बचें।
भोजन कम मात्रा में लेकिन समय पर करें।
आचार्य बाघभट्ट का मानना था कि कम भूख लगने पर जबरदस्ती भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि मंद अग्नि पर भारी भोजन विष के समान प्रभाव डाल सकता है।
Acharya Vagbhata Ayurveda : बारिश का पानी पीने के आयुर्वेदिक लाभ
आयुर्वेद में शुद्ध वर्षा जल को आकाशीय जल माना गया है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि वर्षा के स्वच्छ जल को संग्रहित करके उपयोग करते थे। मान्यता है कि साफ वातावरण में गिरा वर्षा जल हल्का होता है और शरीर द्वारा आसानी से ग्रहण किया जा सकता है।
Acharya Vagbhata Ayurveda : संभावित लाभ
शरीर को हल्का महसूस कराने में सहायक
पाचन पर कम भार डालता है
त्वचा और बालों के लिए उपयोगी माना जाता है
कुछ लोग इसे खनिज संतुलन के लिए लाभकारी मानते हैं
गर्मी के बाद शरीर को शीतलता प्रदान कर सकता है
हालांकि आधुनिक दृष्टि से यह ध्यान रखना जरूरी है कि बारिश का पानी तभी उपयोग करें जब वह स्वच्छ तरीके से संग्रहित और फिल्टर किया गया हो। प्रदूषित क्षेत्रों में सीधे वर्षा जल को पीना सुरक्षित नहीं माना जाता।
Acharya Vagbhata Ayurveda : क्या बारिश का पानी साल भर पी सकते हैं?
आयुर्वेदिक परंपरा में वर्षा जल को संग्रहित करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन इसके लिए विशेष सावधानियां आवश्यक हैं:
पहली बारिश का पानी संग्रहित न करें।
साफ छत या विशेष वर्षा जल संग्रहण प्रणाली का उपयोग करें।
पानी को छानकर और उबालकर ही पीएं।
बंद और स्वच्छ पात्र में संग्रहित करें।
विशेषज्ञों के अनुसार उचित शुद्धिकरण के बिना लंबे समय तक संग्रहित वर्षा जल का सेवन नहीं करना चाहिए।
Acharya Vagbhata Ayurveda : सर्दी ऋतु में आचार्य बाघभट्ट की सलाह
वर्षा के बाद शीत ऋतु आती है। इस समय पाचन शक्ति प्रबल मानी गई है। इसलिए आचार्य बाघभट्ट ने पौष्टिक और बलवर्धक आहार की सलाह दी है।
घी और तिल का सेवन
बाजरा, मक्का और गेहूं
गर्म दूध और सूखे मेवे
अदरक, लहसुन और सोंठ का उपयोग
सर्दियों में शरीर ऊर्जा अधिक मांगता है, इसलिए संतुलित मात्रा में पौष्टिक भोजन लाभकारी माना गया है।
Acharya Vagbhata Ayurveda : गर्मी में क्या खाना चाहिए?
ग्रीष्म ऋतु में पित्त दोष बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए आचार्य बाघभट्ट ने शीतल, रसयुक्त और हल्के आहार की सलाह दी है।
जौ का पानी
छाछ
नारियल पानी
तरबूज, खरबूजा जैसे मौसमी फल
कम मसाले वाला भोजन
अत्यधिक तीखा, खट्टा और तला हुआ भोजन गर्मी में पित्त को बढ़ा सकता है।
आचार्य बाघभट्ट की ऋतुचर्या आज भी स्वास्थ्य विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। उनका संदेश स्पष्ट है कि मौसम के अनुसार भोजन ही सर्वोत्तम औषधि है। वर्षा ऋतु में हल्का और सुपाच्य भोजन, पत्तेदार सब्जियों में सावधानी तथा स्वच्छ वर्षा जल का विवेकपूर्ण उपयोग शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है। वहीं सर्दी में पौष्टिक और गर्म भोजन तथा गर्मी में शीतल और हल्का आहार अपनाकर वात, पित्त और कफ को संतुलित रखा जा सकता है। यही आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है—प्रकृति के साथ सामंजस्य ही स्वास्थ्य की सबसे बड़ी कुंजी है।



