MP Wildlife Conservation : बाघों की बढ़ती दहाड़, चीतों तक बढ़ा कुनबा,जंगल, वन्यजीव और जैव विविधता की सुरक्षा
MP Wildlife Conservation : मध्यप्रदेश… देश के वन्यजीव संरक्षण के नक्शे पर अपनी खास पहचान बना रहा है… बाघों की दहाड़ से लेकर घने जंगलों में जैव विविधता के संरक्षण तक… प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन पर लगातार जोर दिया जा रहा है।यहां के घने जंगल… प्राकृतिक संपदा… और वन्यजीवों की अनमोल दुनिया। मध्यप्रदेश की पहचान उसके समृद्ध वन क्षेत्र और विविध वन्यजीवों से जुड़ी है। ऐसे में मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में गिना जाता है। बाघ संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा जैसे टाइगर रिजर्व वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास और संरक्षण प्रयासों के प्रमुख केंद्र हैं। वन्यजीव संरक्षण का दायरा बाघों तक सीमित नहीं है। तेंदुआ, हिरण, गौर और कई अन्य प्रजातियां जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन का हिस्सा हैं।ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी, अवैध शिकार पर नियंत्रण, जंगलों की रक्षा और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी है। संरक्षण की सफलता के लिए पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन भी महत्वपूर्ण है।
MP Wildlife Conservation : मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य है, जिसे टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट और चीता स्टेट जैसे कई गौरवशाली दर्जा प्राप्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चीता प्रोजेक्ट के तहत नीमच जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता (CCB-2) को खुले जंगल में विमुक्त किया। मादा चीता को बोत्सवाना से कूनो नेशनल पार्क लाया गया था। अब इसे गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित कर खुले जंगल में छोड़ा गया है। इसके साथ ही अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आशीर्वाद से प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में चीतों की संख्या बढ़कर अब 56 हो गई है, जो वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश देश का दिल है और यहां के वनांचल का भी समृद्ध इतिहास रहा है।
MP Wildlife Conservation : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि आज गौरवशाली दिन है, जब “चीता प्रोजेक्ट” के तीसरे चरण में एक मादा चीता को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में छोड़ा गया है। अभयारण्य में गत वर्ष छोड़े गए सभी चीते पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में शुरु किया गया ‘चीता प्रोजेक्ट’ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में विलुप्त हुए प्राणियों को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। हमारा प्रदेश चीता स्टेट के साथ टाइगर स्टेट, घड़ियाल स्टेट और गिद्ध स्टेट के रूप में जाना जाता है। अब जंगली भैंसे भी असम से लाए गए हैं इसके साथ ही राज्य में हाथियों की संख्या भी लगभग 100 हो गई है। मध्य प्रदेश बाघों की संख्या में देश में शीर्ष पर है। राज्य में लेपर्ड, घड़ियाल, गिद्ध और भेड़िया भी सर्वाधिक संख्या में पाए जाते हैं। राज्य में 10 राष्ट्रीय उद्यान और 25 वन्यजीव अभयारण्य अधिसूचित हैं। इसके अलावा कान्हा, पेंच, सतपुड़ा, बांधवगढ़, पन्ना और संजय समेत प्रमुख टाइगर रिजर्व मौजूद हैं। ऐसे में प्रदेश में पर्यटन बढ़ने के साथ स्थानीय नागरिकों को रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश की वन्यजीव संपदा केवल राज्य की पहचान नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन की धरोहर भी है। वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को मजबूत बनाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगलों को सुरक्षित रखना समय की जरूरत है।


