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भोपाल में ‘जीरो शैडो डे’: जानिए इस अद्भुत खगोलीय घटना का रहस्य

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भोपाल में 'जीरो शैडो डे'

भोपाल में ‘जीरो शैडो डे’: जब आपकी परछाई भी आपको छोड़ दे!

क्या आपने कभी ऐसा दिन देखा है जब आपकी परछाई ही दिखाई न दे? जी हां, भोपाल में 14 जून 2025 को ठीक ऐसा ही हुआ। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को Zero Shadow Day कहते हैं। इस दिन दोपहर के समय कोई भी वस्तु या व्यक्ति की छाया नहीं दिखती। यह घटना सूर्य की खास स्थिति के कारण होती है, और वैज्ञानिक रूप से बेहद रोचक मानी जाती है।


क्या है ‘जीरो शैडो डे’?

Zero Shadow Day वह दिन होता है जब सूर्य सीधे हमारे सिर के ऊपर स्थित होता है। इस स्थिति में सूरज की किरणें एकदम ऊपर से आती हैं, जिससे कोई भी चीज़ अपनी छाया जमीन पर नहीं डालती, या फिर उसकी छाया उसके बिल्कुल नीचे बनती है और दिखाई नहीं देती।

  • यह घटना केवल उन्हीं स्थानों पर होती है जो कर्क रेखा (Tropic of Cancer) और मकर रेखा (Tropic of Capricorn) के बीच स्थित होते हैं।
  • इस दिन सूरज 90 डिग्री के कोण पर होता है, जिससे छाया अदृश्य हो जाती है।

भोपाल में कब और क्यों होता है ‘Zero Shadow Day’?

भोपाल भारत के मध्य भाग में स्थित है और यह कर्क व मकर रेखा के बीच आता है। इसी कारण यहां हर साल दो बार यह घटना देखने को मिलती है:

  • पहली बार: 13 से 14 जून के बीच
  • दूसरी बार: 28 जून को सूर्य के लौटते समय

इस साल यानी 2025 में, भोपाल के दक्षिणी हिस्सों में 13 जून को और मुख्य शहर में 14 जून को Zero Shadow Day मनाया गया।


बच्चों को दी गई वैज्ञानिक जानकारी

इस अनोखी खगोलीय घटना को समझाने और विज्ञान के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने भोपाल में ‘विज्ञान चौपाल’ का आयोजन किया। इसमें उन्होंने छात्रों को लाइव डेमो के जरिए बताया:

  • छड़ी जैसी वस्तु को दोपहर में जमीन पर खड़ा करने से उसकी छाया नहीं दिखती।
  • ऐसा सूर्य की 90 डिग्री स्थिति के कारण होता है।

सारिका घारू ने यह भी समझाया कि सूर्य साल भर में एक बार कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच उत्तर-दक्षिण की दिशा में झुकाव के साथ आगे-पीछे होता है। इसी चलते अलग-अलग शहरों में अलग-अलग तारीख को यह घटना घटित होती है।


अगला ‘जीरो शैडो डे’ कब होगा?

इस वर्ष 2025 में सूर्य 21 जून को कर्क रेखा पर पहुंचेगा और इसके बाद वह फिर से दक्षिण दिशा की ओर लौटना शुरू करेगा। इसके चलते 28 जून को भोपाल में फिर से Zero Shadow Day जैसी स्थिति बनेगी।


क्यों है यह घटना खास?

  • यह खगोलीय घटना सिर्फ पृथ्वी के विशेष अक्षांशों पर ही देखी जा सकती है।
  • यह विज्ञान और खगोलशास्त्र को समझने का अनूठा मौका देती है।
  • स्कूलों, विज्ञान क्लबों और शोध संस्थानों के लिए यह एक बेहतरीन शैक्षिक अवसर होता है।

पाठकों के लिए एक विशेष सुझाव

अगर आप विज्ञान में रुचि रखते हैं या अपने बच्चों को अंतरिक्ष और खगोलीय घटनाओं के बारे में जागरूक करना चाहते हैं, तो अगली बार जब Zero Shadow Day आए, उसे जरूर लाइव देखें। एक साधारण छड़ी से इस अद्भुत घटना को घर या स्कूल के आंगन में भी देखा जा सकता है।


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