iran war : ईरान और अमेरिका के बीच जारी Iran War के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें रखे जाने की जानकारी दी है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई के मुताबिक, ये शर्तें कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाई गई हैं और अब तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।
Iran War में बातचीत के लिए ईरान की 7 शर्तें
ईरानी अधिकारी के अनुसार, Iran War को खत्म करने और अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए तेहरान ने सात शर्तें अमेरिका को भेजी हैं। हालांकि, ईरान की ओर से इन सातों शर्तों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।
अभी तक रेजाई ने तीन प्रमुख मांगों का उल्लेख किया है—सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना।
Iran War में फ्रीज फंड और नौसैनिक नाकाबंदी बड़ा मुद्दा
Iran War के बीच ईरान ने अपने फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करने की मांग की है। इसके अलावा तेहरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने को भी बातचीत की शर्तों में शामिल किया है।
ईरान का कहना है कि युद्ध समाप्त करने और बातचीत का रास्ता खोलने के लिए इन मुद्दों पर प्रगति जरूरी है।
Iran War पर ट्रंप को ईरान की ‘निर्णायक युद्ध’ की चेतावनी
बातचीत की पेशकश के साथ ईरान ने अमेरिका को कड़ा संदेश भी दिया है। मोहन रेजाई ने कहा कि ट्रंप की धमकियों से कोई परिणाम हासिल नहीं होगा और ईरान ‘निर्णायक युद्ध’ के लिए तैयार है।
इस बयान से साफ है कि तेहरान एक तरफ कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ संभावित सैन्य कार्रवाई की स्थिति के लिए अपनी तैयारी का संकेत भी दे रहा है।
Iran War में एक और अमेरिकी हमले की आशंका
ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने एक और अमेरिकी हमले की संभावना से इनकार नहीं किया है। उनके मुताबिक, ईरानी सैन्य आकलन में नए अमेरिकी हमले की संभावना मौजूद है और इसके लिए तेहरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है।
रेजाई ने दावा किया कि ईरान की सैन्य योजना अब फारस की खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक मौजूद अमेरिकी नौसैनिक संसाधनों पर केंद्रित है। उन्होंने एक अमेरिकी पोत या विमानवाहक पोत के पास बहु-वॉरहेड एंटी-शिप मिसाइल के परीक्षण का भी दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
Iran War में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता
Iran War के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिशों में कतर और पाकिस्तान की भूमिका सामने आई है। कतर ने ईरान की शर्तें वॉशिंगटन तक पहुंचाई हैं, जबकि पाकिस्तान भी दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक संपर्क बहाल करने की कोशिशों में शामिल है।
ईरान और अमेरिका के बीच पहले हुआ समझौता पिछले महीने समाप्त हो गया था। इसके बाद क्षेत्रीय देशों की ओर से संघर्ष खत्म कराने और बातचीत का रास्ता खोलने के प्रयास जारी हैं।
Iran War में परमाणु नीति पर ईरान का रुख
ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। रेजाई के अनुसार, तेहरान ने अभी परमाणु अप्रसार संधि यानी NPT से बाहर निकलने का फैसला नहीं किया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की आगे की कार्रवाई ईरान को इस दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती है।
ईरानी अधिकारी ने कहा कि देश की परमाणु नीति में फिलहाल बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, आगे की परिस्थितियों के आधार पर नीति में बदलाव की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है।
Iran War में होर्मुज स्ट्रेट भी अहम मुद्दा
Iran War के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी ईरान का रुख महत्वपूर्ण बना हुआ है। रेजाई ने बताया कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर एक समझौते के बेहद करीब पहुंचने के बाद उसे रोक दिया गया था।
उन्होंने कहा कि ईरान और ओमान के बीच समझौते का ढांचा अभी भी तैयार है, हालांकि उसे सार्वजनिक करने के लिए क्षेत्रीय समर्थन की आवश्यकता हो सकती है।
Iran War: बातचीत का रास्ता या बढ़ेगा सैन्य टकराव?
ईरान की ओर से सात शर्तें अमेरिका तक पहुंचाए जाने के बाद अब तेहरान अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा है। एक तरफ ईरान बातचीत के लिए शर्तें रख रहा है, वहीं दूसरी तरफ संभावित नए अमेरिकी हमले के लिए सैन्य तैयारी की बात कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में आगे की दिशा अमेरिका के जवाब, कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता तथा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क पर निर्भर करेगी। फिलहाल ईरान की सातों शर्तों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए बाकी चार शर्तों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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