Report: Prem Shrivastva
JSSC-CGL पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL परीक्षा मामले को लेकर राज्य सरकार और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। जमशेदपुर परिसदन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से हाई कोर्ट में दाखिल हालिया हलफनामे में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को दूषित बताया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि पहले अदालत के समक्ष दाखिल हलफनामों में क्या तथ्य रखे गए थे और अब सरकार के रुख में बदलाव क्यों आया है।
मरांडी ने कहा कि यदि पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित थी तो सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक समेत भर्ती प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पहले अदालत के सामने पूरी जानकारी क्यों नहीं रखी गई।
मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर भी उठाए सवाल
JSSC-CGL बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी सरकार की जानकारी या निगरानी के बिना कैसे हुई। उनका कहना है कि यदि सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी तो निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठता है और यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
JSSC-CGL उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि पूरी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी थी तो केवल निचले स्तर के लोगों की जवाबदेही तय करना पर्याप्त कैसे हो सकता है। मरांडी ने भर्ती व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
सीआईडी जांच पर सवाल, सीबीआई जांच की मांग दोहराई
JSSC-CGL नेता प्रतिपक्ष ने पहले हुई सीआईडी जांच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं थीं तो शुरुआती जांच में ये तथ्य सामने क्यों नहीं आए। मरांडी ने कहा कि जिस जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हों, उसके भरोसे लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मामले को नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई। साथ ही प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को जेएसएससी से हटाने तथा मनोज कौशिक को सीआईडी एडीजी के पद से हटाने की मांग की। उन्होंने अनुराग गुप्ता समेत भर्ती प्रक्रिया और उससे जुड़ी जांच में भूमिका निभाने वाले अधिकारियों की स्वतंत्र जांच की मांग भी रखी।
मरांडी ने कहा कि जांच में जिन लोगों के खिलाफ साक्ष्य सामने आएं, उनके खिलाफ पद और प्रभाव की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उनके ये आरोप और मांगें राजनीतिक बयान हैं; संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच या न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा।
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