BY: Yoganand Shrivastva
Ziona Chana Family आज के दौर में जब संयुक्त परिवार लगातार छोटे होते जा रहे हैं और लोग पढ़ाई, नौकरी या बेहतर अवसरों के लिए अलग-अलग शहरों में बस रहे हैं, मिजोरम के बक्तावंग गांव का चाना परिवार एक अलग ही मिसाल पेश करता है। इस परिवार में कभी करीब 200 सदस्य एक साथ रहते थे। परिवार में 39 पत्नियां, 94 बच्चे, 14 बहुएं और 33 पोते-पोतियां समेत कई अन्य सदस्य शामिल थे। परिवार के मुखिया जिओना चाना की वर्ष 2021 में मृत्यु हो चुकी है, लेकिन परिवार की सामूहिक व्यवस्था अब भी चर्चा में रहती है।
धार्मिक समुदाय से हुई परिवार की शुरुआत
Ziona Chana Family इस असाधारण परिवार की कहानी वर्ष 1942 से शुरू होती है। इसी वर्ष खुआंगतुाहा ने ‘लालपा कोहरान थार’ नाम के धार्मिक समुदाय की स्थापना की थी। वर्ष 1997 में उनके निधन के बाद जिओना चाना इस समुदाय के प्रमुख बने और उन्हें ‘होटुपा’ यानी नेता कहा गया। उनके नेतृत्व में परिवार और समुदाय दोनों का विस्तार हुआ।
Ziona Chana Family वर्ष 2021 में जिओना चाना की मृत्यु हो गई। इसके बावजूद परिवार के सदस्य एक साथ रहने और पहले से चली आ रही व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। परिवार की विशाल संख्या के कारण इसकी कहानी लंबे समय से लोगों के लिए आकर्षण का विषय बनी हुई है।
100 कमरों का चार मंजिला मकान
Ziona Chana Family मिजोरम के बक्तावंग की पहाड़ियों के बीच बना ‘चुआन थार रन’ नाम का चार मंजिला मकान अपने आकार के कारण खास पहचान रखता है। बताया जाता है कि इस घर में करीब 100 कमरे हैं। बाहर से आने वाले लोगों के लिए अलग अतिथि गृह भी बनाया गया था। विशाल मकान को देखने के लिए पर्यटक भी पहुंचते हैं और इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ रहने की व्यवस्था देखकर हैरान रह जाते हैं।
इतने बड़े परिवार के लिए घर के भीतर भी अलग-अलग जिम्मेदारियां और रहने की व्यवस्था तय थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिक उम्र की पत्नियां घर के ऊपरी हिस्से में रहती थीं, जबकि कुछ युवा पत्नियों के रहने की व्यवस्था निचली मंजिलों पर थी। परिवार में कामकाज का बंटवारा भी किया गया था, जिससे बड़ी संख्या में सदस्यों के बावजूद रोजमर्रा की व्यवस्था संचालित होती थी।
एक ही छत के नीचे बड़ी संख्या में सदस्य
Ziona Chana Family चाना परिवार की खासियत सिर्फ उसके सदस्यों की संख्या नहीं थी, बल्कि इतने बड़े परिवार का लंबे समय तक एक साथ रहना भी इसे अलग बनाता है। जहां आम परिवारों में कुछ दर्जन लोगों के एक साथ रहने पर व्यवस्था चुनौती बन जाती है, वहीं इस परिवार में करीब 200 सदस्य एक ही पारिवारिक ढांचे का हिस्सा रहे।
39 पत्नियों, 94 बच्चों, 14 बहुओं और 33 पोते-पोतियों सहित परिवार के इतने सदस्यों के लिए भोजन और रोजमर्रा के कामों की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर होती थी। इसी वजह से बक्तावंग स्थित यह परिवार और उसका विशाल घर लंबे समय से लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है।


