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ट्रंप का ट्रैरिफ टेरर, चुनौती या नया अवसर ?

Trump's tariff terror, challenge or new opportunity?

by: vijay nandan

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ का ‘बम’ गिरा दिया है। अब अमेरिकी बाजार में भारत के सामान लगभग दोगुनी कीमत पर बिकेंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम से भारत को लगभग 5 लाख करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। लेकिन अब सवाल ये है कि क्या ट्रंप का ये टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा? क्या इससे कोई संकट आने वाला है..या फिर ये भारत के लिए एक अवसर है..क्योंकि इस तरह की दादागिरी अमेरिका ने पहली बार नहीं दिखाई. भारत को पहले भी अमेरिका ने झुकाने की कोशिश की थी..1965 में लाल गेहूं रोकने की धमकी दी थी. उस भी भारत ने आत्मसम्मान चुना था. 1971 में भारत पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाने की कोशिश की थी। यहां तक कि नौसैनिक बेड़ा बंगाल की खाड़ी तक भेज दिया था। लेकिन तब भी भारत ना झुका था ना डरा था. 1974 में पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिए थे तब भी भारत ना डरा था ना रुका था.. भारत अब भी न डरेगा ना झुकेगा. जानिए इस विशेष रिपोर्ट में..

भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर 27 अगस्त से 50% टैरिफ लागू हो गया है। इसके पहले ये टैरिफ 25% था, यानि अब से अमेरिका में भारतीय सामानों की कीमतें डबल हो जाएंगी तो असर भी डबल होने वाला है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव GTRI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है। 50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वैलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% तक की कमी आ सकती है। जिसका नुकसान भारत में इन प्रोडक्ट्स से जुड़ी कंपनियों को होगा, इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी। देश की अर्थव्यस्था पर भी इसका असर पड़ेगा। दूसरी तरफ अमेरिका में चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देशों के इन सामानों की डिमांड बढ़ जाएगी सीधे तौर पर इन देशों को कंपनियों को फायदा होगा.

बाइट- नीरज खन्ना, चेयरमैन, एक्सपोर्ट काउंसिल ऑफ इंडिया
बाइट- अवधेश अग्रवाल, राष्ट्रीय समंवयक, एक्सपोर्ट, काउंसिल ऑफ इंडिया
बाइट- नवनीत झालानी, कॉर्डिनेटर, राजस्थान हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन
बाइट- जयेश पटेल, डायमंड मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेडर्स, सूरत

वीओ. आइए अब जान लेते हैं ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ से भारत के किस सेक्टर पर कितना असर पड़ेगा..(gfx in) भारत अमेरिका को कुल 7.59 लाख करोड़ का सामान निर्यात करता है.

ये सेक्टर्स-एक्सपोर्ट ₹7.59 लाख करोड़

  • मशीनरी ₹1.68
  • इलेक्ट्रॉनिक ₹1.28
  • ड्रग्स और फार्मा ₹0.92
  • रत्न और ज्वेलरी ₹0.87
  • रेडीमेड गारमेंट्स ₹0.82
  • केमिकल्स ₹0.37
  • पेट्रोलियम प्रोडक्ट ₹0.36
  • अन्य ₹1.29

अन्य उत्पाद में प्लास्टिक, लेदर, सेरेमिक, मसाले, चावल और चंबाकू जैसे उत्पाद शामिल हैं। ट्रंप की इस दादागिरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया X कहा कि इस टैरिफ से भारत को 2.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने टैरिफ को कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

उधर ट्रंप के फैसले की अमेरिका में भी आलोचना हो रही है नेकी हेली के बाद वहां के अर्थशास्त्री जेफरी सैश का कहना है कि भारत पर इतना ज्यादा टैरिफ लगाकर ट्रंप ने अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मारी है, अमेरिका का ही नुकसान किया है। इससे अमेरिका दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा और उसकी कंपनियों का भारी नुकसान होगा। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इस टेरर टैरिफ पूरी तरह से अनुचित बताया. उन्होंने कहा..

“हमारा मानना ​​है कि ये टैरिफ पूरी तरह से अनुचित हैं। क्योंकि जो कारण हमें दिए गए हैं, वही कारण कई अन्य देशों पर भी लागू होते हैं, लेकिन टैरिफ चुनिंदा रूप से हम पर थोपे गए हैं, इसलिए मैं कहता हूं कि ये अनुचित हैं। लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है, हमारी सरकार अपने देश के हितों की रक्षा करेगी और हम सभी संसाधनों के लिए बाज़ारों पर नज़र रखना जारी रखेंगे क्योंकि हमारी आबादी बहुत बड़ी है, जिसकी ऊर्जा सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।”

ये कदम उठा सकता है भारत?

  • यूरोप में जर्मनी, UK, एशियन देशों में सिंगापुर, मलेशिया
  • इन देशों में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग बढ़ रही है।
  • भारत इन बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
  • पर इंजीनियरिंग गुड्स में उत्पादन लागत कम करना होगा।
  • ताकि कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी रहें।

रूस से भारत के तेल खरीदी के बौखलाए ट्रंप ने टैरिफ का सेल्फ गोल दागा है..इससे न सिर्फ भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी घटेगी बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा। हालांकि, यह भारत के लिए नए बाजार तलाशने और अपनी उत्पादन क्षमता को और प्रतिस्पर्धी बनाने का अवसर भी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि मोदी सरकार इस चुनौती का सामना किस तरह करती है और भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर कैसे मजबूती दिलाती है।

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