BY: Yoganand Shrivastva
केंद्र सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में एक और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदल दिया है। अब पीएमओ को ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही देशभर के राजभवनों का नाम भी बदलकर ‘लोकभवन’ कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार यह परिवर्तन केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत के शासकीय मूल्यों में आ रहे व्यापक सांस्कृतिक बदलाव का प्रतीक है। शासन को सत्ता नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी का माध्यम मानने की भावना के साथ इन नामों का चयन किया गया है।
नाम बदलने के पीछे सरकार की सोच
पीएमओ की तरफ से बताया गया कि यह परिवर्तन प्रशासनिक सुधार का हिस्सा है, जो सत्ता केंद्रित विचार से हटकर नागरिक–केंद्रित और सेवा आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देता है। सरकार का मानना है कि औपचारिक संस्थानों को जनता से जोड़ने के लिए उनके नामों में भी राष्ट्र की सोच और संस्कृति झलकनी चाहिए।
पहले भी बदले जा चुके हैं प्रमुख स्थानों के नाम
यह पहला मौका नहीं है जब केंद्र सरकार ने महत्त्वपूर्ण सरकारी स्थलों और संस्थानों के नाम बदले हों।
- राजपथ—जिसे 2022 में बदलकर कर्तव्य पथ किया गया।
सरकार के अनुसार यह नाम सत्ता से कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है। - प्रधानमंत्री आवास—पहले रेस कोर्स रोड के नाम से जाना जाता था, जिसे 2016 में बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया।
इसका उद्देश्य लोककल्याण के मूल मंत्र को प्रमुखता देना बताया गया था।
नए कैंपस में शिफ्ट होगा पीएमओ
पीएमओ अब 78 साल पुराने साउथ ब्लॉक वाले दफ्तर से बाहर निकलकर ‘सेवा तीर्थ’ नाम से विकसित किए गए आधुनिक परिसर में स्थानांतरित होगा। यह बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राजभवन अब कहलाएँगे ‘लोकभवन’
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार देशभर के सभी राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ किया जा रहा है। मंत्रालय ने बताया कि “राजभवन” शब्द औपनिवेशिक मानसिकता की याद दिलाता है, जबकि नया नाम लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता से जुड़ाव को दर्शाता है।





