झारखंड: स्वास्थ्य मंत्री का बेटा अस्पताल निरीक्षण करते दिखा, विपक्ष ने उठाए सवाल

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स्वास्थ्य मंत्री का बेटा अस्पताल निरीक्षण

झारखंड की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब स्वास्थ्य मंत्री का बेटा अस्पताल निरीक्षण करते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। “स्वास्थ्य मंत्री का बेटा अस्पताल निरीक्षण” वाला यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।


📹 वायरल वीडियो: पारस अस्पताल में पहुंचा मंत्री का बेटा

रांची स्थित पारस अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के बेटे कृष अंसारी अचानक सुरक्षा गार्ड और दोस्तों के साथ निरीक्षण करते नजर आए। इस पूरी घटना का वीडियो इंस्टाग्राम रील के रूप में सामने आया, जिसमें कृष मरीजों से बातचीत करते और उनकी समस्याएं सुनते नजर आए। वीडियो में मंत्री आवास में लोगों की शिकायतें सुनते हुए भी कृष दिखाई दिए।


🧑‍⚖️ विपक्ष ने उठाए सवाल: क्या अधिकार है निरीक्षण का?

इस वायरल वीडियो पर भाजपा समेत विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूछा कि कृष अंसारी को किस अधिकार से सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई? क्या यह सत्ता का दुरुपयोग नहीं है?


🗣️ मंत्री इरफान अंसारी की सफाई: “बेटे ने मदद के इरादे से किया काम”

बवाल बढ़ते देख स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया कि उनका बेटा किसी भी सरकारी पद पर नहीं है और यह पूरा मामला एक बीमार शिक्षक को अस्पताल में देखने जाने से जुड़ा है। मंत्री ने बताया कि कृष अपने शिक्षक की तबीयत जानने अस्पताल गया था, जहां कुछ आदिवासी मरीजों की मदद भी की।

🗨️ मंत्री का बयान: “अगर कोई युवा मदद करना चाहता है तो इसमें गलत क्या है? बीजेपी इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रही है।”


🔥 सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ “स्वास्थ्य मंत्री का बेटा अस्पताल निरीक्षण”

इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया है। “स्वास्थ्य मंत्री का बेटा अस्पताल निरीक्षण” वाला कीवर्ड ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रेंड करने लगा। इसके बाद कृष ने इंस्टाग्राम से वायरल पोस्ट हटा दिया।


🏛️ भाजपा का आरोप: यह संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन

भाजपा नेताओं ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों के दुरुपयोग का भी है। मंत्री के बेटे का इस तरह अस्पतालों का निरीक्षण करना नियमों का उल्लंघन है। वे यह भी कह रहे हैं कि इस पर सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए।


📰 राजनीतिक बयानबाजी तेज, सरकार बैकफुट पर

जहां मंत्री अपने बेटे का बचाव कर रहे हैं, वहीं राज्य की राजनीति में यह मुद्दा और गरमा गया है। बीजेपी नेताओं ने इसे सत्ता के अति प्रयोग का उदाहरण बताया और मामले की जांच की मांग की है।


🔁 निष्कर्ष: इंसाफ या प्रचार?

स्वास्थ्य मंत्री का बेटा अस्पताल निरीक्षण करने क्यों गया—क्या यह समाजसेवा की भावना थी या राजनीतिक शक्ति का दुरुपयोग? यह बहस अभी जारी है। लेकिन इस मामले ने यह तो साबित कर दिया कि सोशल मीडिया की एक रील किस तरह राजनीति में भूकंप ला सकती है।

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