सुप्रिया सुले की जीवनी: शरद पवार की बेटी, सशक्त नेता और सामाजिक कार्यकर्ता

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सुप्रिया सुले — एक समर्पित और प्रभावशाली भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो अपने सामाजिक सरोकारों, मजबूत नेतृत्व और संसद में सक्रिय भागीदारी के लिए जानी जाती हैं। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से लोकसभा सांसद के रूप में, उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सुप्रिया सुले का जन्म 30 जून 1969 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। वह अनुभवी राजनेता शरद पवार और प्रतिभा पवार की पुत्री हैं। उन्होंने मुंबई के जय हिंद कॉलेज से माइक्रोबायोलॉजी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से जल प्रदूषण पर एक पाठ्यक्रम पूरा किया।

राजनीतिक करियर

सुप्रिया सुले ने 2006 में राज्यसभा सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 2009 में, उन्होंने बारामती से लोकसभा चुनाव जीता और तब से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वह महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और कृषि सुधार जैसे मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करती हैं।

प्रमुख पहल और विधायी कार्य

  • पुस्तक दूत योजना: ग्रामीण महाराष्ट्र में साक्षरता और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई यह योजना छात्रों को विविध पुस्तकें प्रदान करती है और स्वयंसेवकों के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में पुस्तकें पहुंचाती है।
  • स्तन कैंसर (जागरूकता और मुफ्त उपचार) विधेयक, 2017: इस विधेयक के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में महिलाओं के लिए मुफ्त उपचार की व्यवस्था की गई है।
  • विशेष विवाह (संशोधन) विधेयक, 2022: इस निजी सदस्य विधेयक के माध्यम से समान-लैंगिक विवाह को वैध बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

हाल की गतिविधियाँ और समाचार

1. ऑपरेशन सिंदूर में भागीदारी

हाल ही में, भारत सरकार ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एकजुट राजनीतिक रुख पेश करने के लिए सात सर्वदलीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका, ब्रिटेन और जापान भेजने की योजना बनाई है। सुप्रिया सुले इस पहल में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।

2. पुरंदर हवाई अड्डा विवाद

सुप्रिया सुले ने पुरंदर हवाई अड्डे के निर्माण के लिए किसानों की सहमति के बिना ड्रोन सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई और सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की मांग की।

3. मराठी भाषा की रक्षा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए, उन्होंने मराठी भाषा की प्राथमिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया

4. पार्टी पुनर्निर्माण की प्रतिज्ञा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद, सुप्रिया सुले ने आत्मनिरीक्षण और पार्टी के पुनर्निर्माण की प्रतिज्ञा ली, जिसमें समावेशिता, गरिमा और सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया।

विवाद और आरोप

  • बिटकॉइन घोटाला: 2018 के एक क्रिप्टोकरेंसी पोंजी योजना में बिटकॉइन की हेराफेरी के आरोपों में उनका नाम सामने आया, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है।
  • आईपीएल से जुड़ी अनियमितताएँ: 2010 में आईपीएल से जुड़े स्वामित्व और संचालन में अनियमितताओं के आरोपों में उनका नाम आया, लेकिन उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया।

व्यक्तिगत जीवन

सुप्रिया सुले ने 1991 में सदानंद सुळे से विवाह किया। उनके दो बच्चे हैं। विवाह के बाद, उन्होंने कुछ समय के लिए कैलिफोर्निया, इंडोनेशिया और सिंगापुर में बिताया और फिर मुंबई लौट आईं।

निष्कर्ष

सुप्रिया सुले एक समर्पित और प्रभावशाली राजनेता हैं, जो सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करती हैं। उनकी हाल की गतिविधियाँ और बयान उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखते हैं।

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