BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीला कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इस याचिका में सीबीआई जांच और औषधि सुरक्षा तंत्र में सुधार की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में राज्यों के पास पहले से ही कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है।
अखबार पढ़कर दायर कर देते हैं याचिका’ — सॉलिसिटर जनरल
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कई बार याचिकाकर्ता केवल अखबारों की खबरें पढ़कर अदालत में याचिकाएं दाखिल कर देते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकारें इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई कर रही हैं, इसलिए अलग से जांच की जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने पूछा — अब तक कितनी जनहित याचिकाएं दायर कीं?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्होंने अब तक कितनी जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं। जवाब में जब उन्होंने बताया कि उन्होंने आठ से दस ऐसी याचिकाएं दायर की हैं, तो अदालत ने कहा — “याचिका खारिज की जाती है।” सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस बात की ओर इशारा करता है कि अदालतें अब बिना ठोस आधार के जनहित याचिकाओं को मंजूरी देने में सावधानी बरत रही हैं।





