BY: Yoganand Shrivastva
Supreme Court नीट पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज कई FIR रद्द करने का निर्देश दिया है।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समान घटनाओं से संबंधित यदि किसी अन्य राज्य में भी FIR दर्ज है और उसकी जानकारी अदालत के सामने नहीं आई है, तो उसे रद्द करने की मांग का राज्य सरकार विरोध नहीं करेगी।
2873 लोगों के खिलाफ कार्रवाई रहेगी जारी
Supreme Court सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिल्ली पुलिस उन 2,873 लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, इसी प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अब नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

अदालत ने कहा कि यदि देश के किसी अन्य हिस्से में भी इन्हीं घटनाओं को लेकर FIR दर्ज हुई है, तो संबंधित मामलों की जांच आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए हैं।
20 से 25 जुलाई के बीच हुआ था प्रदर्शन
Supreme Court सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। पुलिस ने इस दौरान कुल 13 FIR दर्ज की थीं। मामले में दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आई थीं।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे पर भी निर्देश
Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने NEET परीक्षा 2026 से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी निर्देश दिया। अदालत को बताया गया कि मुआवजे को लेकर नीति तैयार की जाएगी। कोर्ट ने संबंधित नीति को तीन महीने के भीतर तैयार कर उसके अनुसार मुआवजा देने की बात कही।
5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च भी वापस
Supreme Court सुनवाई के दौरान CJP की ओर से सौरव दास ने संगठन का बयान पढ़ते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन को देखते हुए 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया गया है।
सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी विश्वास के साथ आगे बढ़ें तो समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सकता है। उन्होंने खुले दिमाग से बातचीत को समाधान का रास्ता बताया।


