महाकाल मंदिर अन्नक्षेत्र में श्रावण सोमवारों पर मिलेगा विशेष फलाहार, पहले दिन 5 हजार श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था

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BY: Yoganand Shrivastva

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर के नि:शुल्क अन्नक्षेत्र में इस बार श्रावण और भाद्रपद मास के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं को विशेष फलाहारी प्रसाद परोसा जाएगा। इस पहल को मंदिर प्रबंध समिति और दानदाताओं के सहयोग से साकार किया जा रहा है।

श्रावण मास की शुरुआत 11 जुलाई से हो चुकी है और पहला सोमवार 14 जुलाई को पड़ रहा है। इसी दिन से अन्नक्षेत्र में साबूदाना खिचड़ी, आलू चिप्स, आमटी और साबूदाने की खीर जैसे फलाहारी व्यंजन भक्तों को प्रसाद स्वरूप वितरित किए जाएंगे।


एक दिन में 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए होगा फलाहार तैयार

मंदिर के उप प्रशासक और अन्नक्षेत्र प्रभारी सिम्मी यादव के अनुसार, प्रत्येक सोमवार को कम से कम 5 हजार श्रद्धालुओं के लिए फलाहारी प्रसाद की व्यवस्था की जा रही है। बड़े पर्वों और विशेष अवसरों पर यह संख्या और अधिक हो सकती है।

फलाहार तैयार करने में लगने वाली सामग्री में शामिल हैं:

  • 250 किलो साबूदाना
  • 75 किलो मूंगफली
  • 4 क्विंटल आलू
  • 50 किलो तैयार आलू चिप्स
  • 4 डिब्बे मूंगफली तेल
  • 100 किलो दही
  • 125 लीटर दूध (खीर के लिए)
  • 20 किलो हरा धनिया, 15 किलो हरी मिर्च
  • 10 किलो अनारदाना, 3 किलो किशमिश, 2.5 किलो काजू टुकड़ा
  • और आवश्यक मसाले

दो मंजिला भवन में एक साथ बैठ सकते हैं 2000 से अधिक श्रद्धालु

महाकाल लोक के पास स्थापित अन्नक्षेत्र भवन में करीब डेढ़ साल पहले से अत्याधुनिक रसोई की शुरुआत की गई थी। इस दो मंजिला विशाल ढांचे में एक साथ 2000 से ज्यादा लोग बैठकर प्रसादी ग्रहण कर सकते हैं। यहां पर भोजन सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर दोपहर 2 से रात 10 बजे तक उपलब्ध रहता है।

श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन के लिए मंदिर परिसर में बनाए गए काउंटरों से पास प्राप्त करना होता है। सामान्य दिनों में यहां दाल-चावल, रोटी, सब्जी तथा दानदाताओं के माध्यम से लड्डू या खीर परोसी जाती है।


महाशिवरात्रि और श्रावण-भाद्रपद सोमवारों को विशेष फलाहारी व्यवस्था

श्रावण और भाद्रपद के छह सोमवारों के साथ-साथ महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से फलाहारी प्रसाद की व्यवस्था की जाती है। इसमें साबूदाने से बने विविध व्यंजन शामिल रहते हैं, जो उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त होते हैं।