Dimagi Naxal Controversy : ‘दिमागी नक्सल’ को चेतावनी, छग में राजनीति गरमाई,पीएम के बयान के मायने क्या, दिमागी नक्सली कौन ?
Dimagi Naxal Controversy : स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्रचारी से दिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक बयान ने नई सियासी बहस छेड़ दी है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद पर बड़ी जीत हासिल की है, लेकिन अब ऐसी विचारधारा से सावधान रहने की जरूरत है जो युवाओं को गुमराह करती है और विकास के खिलाफ माहौल बनाती है। पीएम मोदी के इस बयान के बाद नक्सलवाद का सबसे ज्यादा दंश झेलने वाले छत्तीसगढ़ में भी सियासत तेज गरमाई हुई है। सरकार और विपक्ष आमने सामने है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए नक्सली विचारधारा को भी समाप्त करने की जरूरत बताई है। तो वहीं कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी,देश के युवाओं, छात्रों और Gen Z का अपमान बताया। अब इस मुद्दे पर सबसे बड़ी बहस यही है… कौन है दिमागी नक्सली ? ऐसे में सवाल यही है कि क्या ‘दिमागी नक्सल’ वास्तव में वैचारिक नक्सलवाद के खिलाफ चेतावनी है, या फिर विपक्ष और सरकार के बीच नई राजनीतिक बहस का हथियार ? इसी मुद्दे पर करेंगे चर्चा लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।।
Dimagi Naxal Controversy : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान..(एंबियंस)….. प्रधानमंत्री के इस बयान की छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। क्योंकि बस्तर समेत प्रदेश के बड़े इलाके दशकों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। जिन इलाकों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शस्त्रधारी नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नक्सली विचारधारा को समाप्त करना भी जरूरी है। तभी नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा संभव होगा। वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे लोगों और विचारों से सतर्क रहना होगा, जो विकास और राष्ट्र की प्रगति में बाधा बनते हैं।
Dimagi Naxal Controversy : लेकिन प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान ने अब राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। भाजपा इशारों-इशारों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और उसकी विचारधारा पर निशाना साध रही है। तो कांग्रेस की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा…कि मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है। उधर छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि देश के युवाओं, छात्रों और Gen Z को नक्सली विचारधारा से जोड़ना उनका अपमान है। बैज का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले हर व्यक्ति को किसी विचारधारा का ठप्पा लगाना उचित नहीं है।बहरहाल अब पीएम मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से बना एक नया अकाउंट रातोंरात सुर्खियों में आ गया है। इस अकाउंट ने महज 24 घंटों में 1.7 लाख से अधिक फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं। ऐसे में सवाल अब सिर्फ जंगलों में बंदूक थामे नक्सलियों का नहीं… बल्कि विचारधारा, असहमति और लोकतंत्र की सीमाओं को लेकर भी है। लेकिन प्रधानमंत्री के बयान ने एक नई राजनीतिक और वैचारिक बहस छेड़ दी है। जिसके बाद सवाल यही है कि आखिर दिमागी नक्सली कौन ?
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