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Dimaagi Naxali Debate: ‘शस्त्रधारी नक्सली’ के बाद अब ‘दिमागी नक्सली’ पर वार, छत्तीसगढ़ में सियासत तेज

Dimaagi Naxali Debate

Dimaagi Naxali Debate: 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नक्सलवाद को लेकर दिए बयान के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद पर काफी हद तक विजय प्राप्त कर ली है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की जरूरत है। पीएम मोदी के इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

Dimaagi Naxali Debate: नक्सलवाद का लंबे समय तक दंश झेल चुके छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री के बयान को खास महत्व दिया जा रहा है। बस्तर समेत प्रदेश के कई इलाकों में दशकों तक नक्सली हिंसा और सुरक्षा चुनौतियां बनी रहीं। अब सुरक्षा अभियानों के बीच नक्सली विचारधारा को लेकर भी राजनीतिक बहस सामने आ गई है।

Dimaagi Naxali Debate: सीएम साय और अरुण साव ने पीएम मोदी के बयान का किया समर्थन

Dimaagi Naxali Debate: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हथियारबंद नक्सलियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नक्सली विचारधारा को समाप्त करना भी जरूरी है, तभी नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा संभव होगा।

Dimaagi Naxali Debate: मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्र की मोदी सरकार के दृढ़ संकल्प और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नक्सलवाद के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति और विकास में बाधा बनने वाली विचारधाराओं और गतिविधियों से सतर्क रहने की जरूरत है। बीजेपी का कहना है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में हिंसा के साथ-साथ उस विचारधारा को भी चुनौती देना जरूरी है, जो युवाओं को हिंसा के रास्ते पर ले जाती है।

Dimaagi Naxali Debate: चिदंबरम और दीपक बैज की प्रतिक्रिया से बढ़ा राजनीतिक विवाद

Dimaagi Naxali Debate: प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर कांग्रेस की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

Dimaagi Naxali Debate: छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं, छात्रों और Gen Z को नक्सली विचारधारा से जोड़ना उनका अपमान है। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और असहमति जताना नागरिकों का अधिकार है।

वहीं बीजेपी का तर्क है कि नक्सलवाद केवल हथियार उठाने तक सीमित नहीं है और हिंसक विचारधारा को वैचारिक स्तर पर चुनौती देना भी जरूरी है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है।

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अब बहस का केंद्र यही सवाल बन गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का राजनीतिक और वैचारिक संदर्भ क्या है। एक तरफ बीजेपी इसे नक्सली विचारधारा के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के रूप में देख रही है, वहीं कांग्रेस इसे असहमति की आवाज को निशाना बनाने की कोशिश बता रही है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियानों के बीच यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं। अब देखना होगा कि ‘दिमागी नक्सली’ की परिभाषा को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच यह सियासी टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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