Hormuz Strait Shipping Deal : होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच हुई ताजा बातचीत ने इस बेहद अहम समुद्री मार्ग को एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। दोनों देशों ने जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक नेविगेशन व्यवस्था पर सहमति बनाई है। हालांकि, इस समझौते के बाद भी होर्मुज से सामान्य शिपिंग पूरी तरह बहाल होने का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है।

Hormuz Strait Shipping Deal : खाड़ी से दुनिया तक पहुंचने वाला अहम रास्ता
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है। यहां से बड़ी संख्या में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर उसका असर सिर्फ ईरान और आसपास के देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
Hormuz Strait Shipping Deal : ईरान और ओमान ने तैयार किया नया रूट
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने बताया कि दोनों देशों के बीच सुरक्षित नेविगेशन के लिए समुद्री मार्ग के नक्शे को लेकर सहमति बन गई है। इसके लिए पहले से चल रही तकनीकी बातचीत को आगे बढ़ाया गया।
दोनों देशों ने 18 जून को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन और पर्यावरण जैसे मुद्दों से जुड़े अधिकारियों ने बातचीत में हिस्सा लिया और प्रस्तावित व्यवस्था को अंतिम रूप देने की दिशा में काम किया।
Hormuz Strait Shipping Deal : टोल को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं
ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह के शुल्क या टोल की मांग पहले सामने आती रही है। ऐसे में इस नई व्यवस्था को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या भविष्य में जहाजों से शुल्क वसूली की कोई प्रणाली बनाई जाएगी।
हालांकि, अभी तक दोनों देशों की ओर से ऐसी किसी संयुक्त टोल व्यवस्था की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल सामने आई सहमति का केंद्र सुरक्षित नेविगेशन है।
Hormuz Strait Shipping Deal : समझौता हुआ, लेकिन रास्ता पूरी तरह नहीं खुला
ईरान और ओमान के बीच बनी सहमति को अंतिम मंजूरी मिलने से पहले कुछ औपचारिक काम बाकी हैं। दोनों पक्ष संयुक्त बयान की भाषा समेत अन्य बिंदुओं पर चर्चा कर रहे हैं।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि नेविगेशन को लेकर हुई व्यवस्था का मतलब होर्मुज पर उसके संप्रभु अधिकारों में किसी बदलाव से नहीं है।
Hormuz Strait Shipping Deal : अमेरिका की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अमेरिका को लेकर है। ईरान का कहना है कि होर्मुज में सामान्य वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने के लिए अमेरिकी कदमों का भी असर पड़ेगा।
तेहरान ने अमेरिका से कथित नौसैनिक दबाव और नाकेबंदी खत्म करने की मांग की है। ईरान का आरोप है कि वॉशिंगटन ने पहले किए गए कुछ वादों का पालन नहीं किया, जिसके चलते वह मुआवजे की मांग भी उठा रहा है।
Hormuz Strait Shipping Deal : ट्रंप के रुख पर रहेगी दुनिया की नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा सकती है। ईरान और ओमान ने अपने स्तर पर नेविगेशन व्यवस्था को लेकर आगे बढ़ने का संकेत दिया है, लेकिन होर्मुज में लंबे समय के लिए स्थिर शिपिंग व्यवस्था बनाने के लिए क्षेत्रीय तनाव कम होना जरूरी माना जा रहा है।
अब नजर इस बात पर है कि ईरान और ओमान संयुक्त बयान में समझौते की क्या शर्तें रखते हैं और अमेरिका इस पूरी प्रक्रिया पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
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