by: vijay nandan
दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सहारा समूह के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर ओ. पी. श्रीवास्तव को लाखों करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। उन पर निवेशकों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने और शेल कंपनियों के माध्यम से फंड की हेराफेरी का आरोप है। ‘सहाराश्री’ सुब्रत रॉय के निधन के बाद समूह की संपत्तियों की बिक्री में भी ओ. पी. श्रीवास्तव की भूमिका संदिग्ध बताई जाती रही है। जांच के दौरान 707 एकड़ भूमि की जब्ती के बाद श्रीवास्तव का नाम प्रमुखता से सामने आया। आरोप है कि उन्होंने मध्य प्रदेश में भी सहारा समूह की सैकड़ों एकड़ जमीन के विवादित सौदे कराए। सूत्रों के अनुसार, भोपाल, जबलपुर और कटनी में सहारा ग्रुप की लगभग 310 एकड़ भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1000 करोड़ रुपये थी, उसे कुछ ही करोड़ों में बेच दिया गया। खबरों में दावा है कि इन सौदों में बीजेपी विधायक संजय पाठक को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं।
- बताया जाता है कि—
- भोपाल की 110 एकड़ जमीन मात्र 48 करोड़,
- जबलपुर की 100 एकड़ जमीन लगभग 20 करोड़,
- और कटनी की 100 एकड़ जमीन करीब 22 करोड़ रुपये में बेची गई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, भूमि बिक्री से प्राप्त राशि SEBI–Sahara के संयुक्त खाते में जमा की जानी थी, लेकिन यह नियम पालन नहीं किया गया। कहा जा रहा है कि, सुब्रत राय के निधन के बाद सहारा समूह के स्वामित्व वाली जमीनों को बेचने के लिए उनके करीबी परिजनों और ओपी श्रीवास्तव के बीच अनबन भी शुरू हो गई थी। अब सवाल ये है कि क्या प्रदेश सरकार यहां के निवेशकों को न्याय दिलाने ओपी श्रीवास्तव की ट्रांजिट रिमांड की मांग करेगी, क्योंकि सहारा चिटफंड कंपनी में प्रदेश के लाखों लोगों का करोड़ों रुपया फंसा हुआ है।

बता दें कि सहारा समूह के निदेशक ओ पी श्रीवास्तव को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया है, उन पर आरोप है कि निवेशकों की रकम से सहारा समूह ने कई शहरों में जमीन खरीदी थी,,, बाद में कंपनी की मुसीबतें बढ़ने पर इन जमीनों को चुपचाप बेचा जाने लगा। कई सौदों में ओपो श्रीवास्तव की भूमिका बताई जाती है। कहा जा रहा है कि, सुब्रत राय के निधन के बाद सहारा समूह के स्वामित्व वाली जमीनों को बेचने के लिए उनके करीबी परिजनों और ओपी श्रीवास्तव के बीच अनबन भी शुरू हो गई थी।
सवाल ये है कि मध्य प्रदेश में भी सहारा ग्रुप की लाखों करोड़ों की जमीन औने पौने दामों पर बेच दी गई..खबर ये भी है कि मध्य प्रदेश के एक विधायक ने सहारा की जमीन खरीदी है..अब सवाल ये भी है कि क्या प्रदेश सरकार यहां के निवेशकों को न्याय दिलाने ओपी श्रीवास्तव की ट्रांजिट रिमांड की मांग करेगी। जनवरी में शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू की थी, लेकिन जमीन को औने-पौने दामों में बेचने के गड़बड़झाले का कोई नतीजा नहीं निकला, हाईकोर्ट ने ईडी से केस डायरी भी मांगी थी।
सहारा समूह के कई ठिकानों पर पड़े थे छापे
बता दें कि, ओपी श्रीवास्तव को निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने के मामलों में कई राज्यों की पुलिस तलाश रही थी। हमारा इंडिया क्रेडिट सोसाइटी मामले की जांच कर रही ईडी ने बीते वर्ष लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई समेत सहारा समूह के कई ठिकानों पर छापा मारकर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के सबूत जुटाए थे। मामले को लेकर ओपी श्रीवास्तव को लगातार तलब किया जा रहा था। तीन माह पूर्व ईडी की टीम ने उनके महानगर स्थित आवास पर छापा भी मारा था। कंपनी की मुसीबतें बढ़ने पर इन जमीनों को चुपचाप बेचा जाने लगा। इसमें लखनऊ स्थित सहारा की जमीन भी शामिल थी, जिसे जितेंद्र प्रसाद वर्मा ने रियल एस्टेट कंपनी पिनटेल ग्रुप को बेच दिया। वहीं आईआईएम रोड स्थित सहारा सिटी होम्स के अधूरे प्रोजेक्ट को भी अमरावती ग्रुप के हवाले कर दिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि, पिनटेल ग्रुप ने शेल कंपनियां जमीनों को खरीदा था। इन सभी सौदों में ओपी श्रीवास्तव की भूमिका बताई जाती है। कई अहम सौदों में उनके दस्तखत होने की वजह से मामले में सहारा समूह के कई अन्य पदाधिकारियों को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में ईडी ने सहारा ग्रुप की जमीनों की खरीद-फरोख्त कराने वाले मुंबई निवासी जितेंद्र प्रसाद वर्मा और निदेशक अनिल अब्राहम को भी गिरफ्तार किया था।





