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Sadanira Samagam Bhopal : सदानीरा समागम का भव्य समापन: लोकसंगीत, लोकनाट्य और नर्मदा की महिमा से सराबोर हुई अंतिम संध्या

Sadanira Samagam Bhopal : भारत भवन में सात दिवसीय आयोजन का समापन, बघेली लोकगीतों, मांगणियार गायन और ‘नर्मदा हर कंकर शंकर’ नाटक ने बांधा समां

Sadanira Samagam Bhopal : मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित सात दिवसीय ‘सदानीरा समागम’ का समापन भारत भवन, भोपाल में सांस्कृतिक उल्लास और लोक परंपराओं के रंगों के बीच हुआ। समापन समारोह में लोकसंगीत, लोकनाट्य और जल संस्कृति की विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Sadanira Samagam Bhopal

Sadanira Samagam Bhopal : बघेली लोकगीतों से गूंजा भारत भवन

समापन समारोह की शुरुआत पूर्व रंग मंच पर सुप्रसिद्ध लोकगायिका शीला त्रिपाठी एवं उनके दल की प्रस्तुति से हुई। कलाकारों ने जल, नदी, प्रकृति और ग्रामीण जीवन पर आधारित बघेली लोकगीतों का सजीव मंचन किया। गीतों के माध्यम से लोकजीवन की संवेदनाओं और जल संरक्षण के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

Sadanira Samagam Bhopal : मांगणियार परंपरा ने बिखेरा लोकरस

अंतरंग सभागार में राजस्थान के जैसलमेर से आए भुंगर खान मंगणियार एवं उनके दल ने अपनी पारंपरिक मांगणियार गायन शैली से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रस्तुति में नदियों के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व को लोकधुनों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। कमायचा, खड़ताल, ढोलक और हारमोनियम की सुरमयी संगत ने पूरे वातावरण को लोकरस से सराबोर कर दिया।

Sadanira Samagam Bhopal : ‘नर्मदा हर कंकर शंकर’ नाटक ने छोड़ी गहरी छाप

समापन दिवस की अंतिम प्रस्तुति बहिरंग मंच पर कुलवीर सिंह, मुंबई के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक “नर्मदा हर कंकर शंकर…” रही। नाटक में नर्मदा नदी के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय स्वरूप को बेहद संवेदनशील तरीके से मंचित किया गया। नाटक की मुख्य पात्र रेवा एक ऐसी युवती है, जो नर्मदा तट स्थित आश्रम में रहकर आदिवासी समुदायों की शिक्षा, जनजागरूकता और महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य करती है। उसका जीवन नर्मदा की धारा की तरह शांत, समर्पित और निरंतर प्रवाहित दिखाई देता है।

Sadanira Samagam Bhopal : नर्मदा की पौराणिक कथा को किया जीवंत

कहानी में नया मोड़ तब आता है जब विदेश से आया युवक सागर नर्मदा परिक्रमा के दौरान आश्रम पहुंचता है। प्रारंभ में वह आश्रम और रेवा के जीवन को गलत समझता है, लेकिन धीरे-धीरे नर्मदा की महिमा और सेवा भावना से प्रभावित हो जाता है। नाटक में लोकगायक के माध्यम से नर्मदा, सोनभद्र और जोहिला की पौराणिक कथा को भी जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया। अंत में रेवा स्वयं नर्मदा के स्वरूप में दिखाई देती है, जो त्याग, आध्यात्मिक चेतना और लोककल्याण का प्रतीक बनकर उभरती है।

Sadanira Samagam Bhopal : कलाकारों का किया गया सम्मान

कार्यक्रम के समापन पर वीर भारत न्यास की ओर से सभी कलाकारों को विशेष स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सात दिनों तक चले इस आयोजन ने जल संरक्षण, लोकसंस्कृति और भारतीय परंपराओं के महत्व को जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सदानीरा समागम ने यह संदेश दिया कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और जीवन की आधारशिला हैं, जिनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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