Vijay Nandan डिजिटल एडिटर
MP UCC Bill : भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक सदन में पेश कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री गौतम टेटवाल ने विधेयक को विधानसभा के पटल पर रखा। बिल पेश होते ही कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए सदन में आपत्ति दर्ज कराई। सरकार का कहना है कि यह विधेयक प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
MP UCC Bill : UCC की ओर सीएम डॉ. मोहन का इशारा, कहा- आजादी के बाद आज सबसे बड़ा ऐतिहासिक दिन
मानसून सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने 20 जुलाई को कहा कि स्वतंत्रता के बाद आज का दिन बहुत बड़ा है। यह दिन इतिहास में दर्ज होगा। लोग इसे याद रखेंगे.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आज एक ऐतिहासिक दिन है, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। मुझे संतोष है कि आज मध्य प्रदेश विधानसभा में इतिहास का एक अनूठा अध्याय लिखा जाएगा। समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रस्ताव, साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ यह एक यादगार अवसर है। हमारे लिए यह स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा दिन है।

यूसीसी विधेयक के अलावा सरकार ने धन्वंतरि विश्वविद्यालय विधेयक, अग्निशमन सेवा विधेयक, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े संशोधन और अन्य प्रस्तावों सहित कुल 14 विधेयक भी सदन में प्रस्तुत किए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इन सभी विधेयकों पर सत्र के दौरान विस्तार से चर्चा होगी।

MP UCC Bill : यूसीसी बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
प्रस्तावित विधेयक में विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
MP UCC Bill : प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं—
- अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।
- सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक के समान नियम लागू करने का प्रस्ताव।
- एक से अधिक विवाह पर रोक का प्रावधान।
- विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप का भी पंजीकरण कराना आवश्यक होगा।
- लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा और संपत्ति में अधिकार मिलेगा।
- लिव-इन संबंध समाप्त होने पर महिला को भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का अधिकार मिलेगा।
- बेटा, बेटी, माता-पिता, विधवा और विधुर को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रावधान।
- गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव।
- माता-पिता की उपेक्षा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान।
- निकाह हलाला पर भी सख्त प्रावधान
विधेयक के मसौदे में निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध की श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति के मालिक की हत्या का दोषी पाया जाता है, तो उसे उस संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिलेगा।
MP UCC Bill : पूर्व न्यायाधीश की समिति ने तैयार किया मसौदा
सरकार के अनुसार यूसीसी का प्रारूप सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है। समिति ने विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन किया और जनसुझाव प्राप्त करने के लिए विशेष पोर्टल के माध्यम से लाखों लोगों से राय भी ली।

MP UCC Bill : विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने सदन में विधेयक पेश किए जाने की प्रक्रिया और यूसीसी के प्रावधानों पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि यदि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, तो अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा कि विधेयक को लेकर व्यापक चर्चा कराई जानी चाहिए। अब इस विधेयक पर विधानसभा में विस्तृत बहस होगी, जिसके बाद इसे पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विपक्ष ने किसानों के मुद्दे पर सदन के बाहर प्रदर्शन किया, विपक्षी खास तौर पर कांग्रेस सदस्य केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव का मखौटा लगाए प्रदर्शन में शामिल हुए।
MP UCC Bill : संपादकीय नजरिया
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का प्रस्तुत होना एक महत्वपूर्ण विधायी पहल है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक कानूनों में समानता लाना बताया जा रहा है। यदि इससे महिलाओं के अधिकार मजबूत होते हैं और कानूनी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी बनती हैं, तो यह सकारात्मक कदम माना जाएगा। वहीं, आदिवासी समुदाय को दायरे से बाहर रखने और कुछ प्रावधानों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी गंभीर चर्चा जरूरी है। ऐसे संवेदनशील कानूनों पर व्यापक बहस, सभी पक्षों की भागीदारी और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप निर्णय ही समाज में विश्वास और संतुलन कायम रख सकते हैं।





