Vijay Nandan डिजिटल एडिटर
Monsoon Session 2026 : नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का पहला दिन हंगामेदार रहा। सोमवार को शुरू हुए सत्र में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। लगातार हो रहे विरोध और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर कई बार स्थगित करनी पड़ी। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार जहां कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने पहले दिन से ही विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाया।
Monsoon Session 2026 : NEET पेपर लीक और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष का हमला
सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्षी सांसदों ने नीट-यूजी पेपर लीक, अयोध्या श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद, एथेनॉल नीति, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे उठाए। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।

लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी की। स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटकर सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग करने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।
Monsoon Session 2026 : बार-बार स्थगित होती रही कार्यवाही
विपक्ष के विरोध के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर कई बार बाधित हुई। सदनों की कार्यवाही पहले 12 बजे, फिर 12:30 बजे, उसके बाद 1 बजे और बाद में फिर स्थगित करनी पड़ी। लगातार हंगामे के कारण सामान्य विधायी कार्य प्रभावित रहे।
Monsoon Session 2026 : सरकार का एजेंडा: सात अहम विधेयकों पर नजर
सरकार इस मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराने की योजना लेकर आई है। इनमें आयकर संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक सहित कुल सात प्रमुख बिल शामिल हैं।
Monsoon Session 2026 : सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी का संदेश
संसद भवन पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिस तरह देश के लिए मानसून महत्वपूर्ण होता है, उसी तरह संसद का मानसून सत्र भी सकारात्मक और परिणामकारी होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र देशहित में सार्थक चर्चा और महत्वपूर्ण निर्णयों का माध्यम बनेगा।
#WATCH | Delhi: On the Monsoon session of Parliament, PM Narendra Modi says, "I am firmly convinced that where there are facts and logic, there is no room for a storm."
— ANI (@ANI) July 20, 2026
"Positive spirit is essential for achieving the nation's goals. Our House has very experienced Members of… pic.twitter.com/IzFWB4NoTI
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद भारत ने आर्थिक मजबूती बनाए रखी और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेज विकास दर दर्ज की है।
विपक्षमें किसने क्या कहा ..
#WATCH | Delhi: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi and Congress MP Priyanka Gandhi leave from the Parliament
— ANI (@ANI) July 20, 2026
Lok Sabha has been adjourned to meet again at 2:00 PM today. pic.twitter.com/rR7ijhBiOY
#WATCH | Delhi | "Lathi-charge on students is an attack on democracy. This government is not capable of staying in power," says LoP Rajya Sabha Mallikarjun Kharge.
— ANI (@ANI) July 20, 2026
"We have also raised the issue of theft of donations (at Ayodhya Ram Temple). Modi sahib should take… pic.twitter.com/4UyPRZpS4Q
#WATCH | Delhi: Samajwadi Party MP Akhilesh Yadav says, "Our MPs have been kept at the police station while children are being beaten up outside. What kind of government is this? You do not want to listen to the children. If the NEET examination took place and irregularities… pic.twitter.com/CLcLdw7xri
— ANI (@ANI) July 20, 2026

Monsoon Session 2026 : विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक में भी उठाए थे मुद्दे
मानसून सत्र शुरू होने से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सरकार से नीट पेपर लीक, श्रीराम मंदिर से जुड़े विवाद, एथेनॉल नीति, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने की मांग की थी। पहले ही दिन इन मुद्दों पर विपक्ष का आक्रामक रुख सदन के भीतर भी देखने को मिला। अब आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इन मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है।
संपादकीय नजरिया
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संसद है, जहां जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। मानसून सत्र के पहले ही दिन लगातार हंगामे और कार्यवाही के बार-बार स्थगित होने से यह संदेश जाता है कि राजनीतिक टकराव, जनहित के मुद्दों पर चर्चा से अधिक हावी हो रहा है। विपक्ष का अधिकार है कि वह सरकार से जवाब मांगे और महत्वपूर्ण विषयों को सदन में उठाए, वहीं सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन मुद्दों पर पारदर्शिता के साथ जवाब दे। लेकिन यदि विरोध केवल नारेबाजी तक सीमित रह जाए और विधायी कार्य प्रभावित हो, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश और जनता को होता है। संसद पर हर दिन करोड़ों रुपये खर्च होते हैं और जनता अपने प्रतिनिधियों से समाधान की उम्मीद करती है, गतिरोध की नहीं। सरकार और विपक्ष दोनों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद, बहस और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि संसद वास्तव में जनहित का सबसे प्रभावी मंच बन सके।
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