MP Gi Tag : मध्यप्रदेश के कृषि, खाद्य उत्पादों और शिल्प को मिल चुके हैं प्रतिष्ठित 27 जीआई टैग

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
MP Gi Tag

MP Gi Tag : वोकल फॉर लोकल का स्वप्न हो रहा है साकार

by: digital desk

MP Gi Tag : मध्यप्रदेश की अनेक शिल्प कलाओं और कृषि, उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर “जीआई टैग” प्राप्त होना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के उन्नत किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, शिल्पकारों और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।

MP Gi Tag

MP Gi Tag : इन्हें मिल चुका है जीआई टैग

बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प, ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रही है।

MP Gi Tag : प्रदेश के अन्य जीआई टैग उत्पाद इस प्रकार हैं: चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन शामिल है।

MP Gi Tag

मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में शीघ्र शामिल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं।

MP Gi Tag : वर्ष 2024 और 2025 में विशेष उपलब्धि

मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और रतलाम जिले के जावरा के लहसुन को जीआई टैग प्राप्त हुआ। इसी तरह वर्ष 2025 में प्रदेश के पांच उत्पाद को जीआई टैग मिला। इनमें छतरपुर जिले के खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर का ही पारंपरिक फर्नीचर, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर का ही पेपर मैश क्राफ्ट शामिल है।

MP Gi Tag : जीआई टैग प्रदान करने का कार्य उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद जीआई टैग की वैधता 10 वर्ष के लिए होती है, जिसे नवीनीकरण का लाभ भी मिलता है। जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अर्थात (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था।

ये भी जानिए MP Success Story : स्वस्थ प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश की है आधारशिला : मुख्यमंत्री

- Advertisement -
Ad imageAd image

MP TOP 10: शिक्षा, सुरक्षा और विकास से जुड़ी अहम अपडेट्स पर एक नजर

1. MP TOP 10: एमपी बोर्ड 10वीं द्वितीय परीक्षा का परिणाम जारी

Ramchandrapur Encroachment Removal: बलरामपुर के रामचन्द्रपुर में अतिक्रमण पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

Ramchandrapur Encroachment Removal: एसडीएम और राजस्व-वन विभाग की मौजूदगी में चल रहा

MP TOP 10: शिक्षा, सुरक्षा और विकास से जुड़ी अहम अपडेट्स पर एक नजर

1. MP TOP 10: एमपी बोर्ड 10वीं द्वितीय परीक्षा का परिणाम जारी

Haldwani Recycling Initiative: हल्द्वानी नगर निगम की अनोखी रीसाइक्लिंग पहल

Haldwani Recycling Initiative: प्लास्टिक कचरा जमा करने पर मिलेगा कैश रिफंड, शहर