जालौन में मौरंग माफियाओं का आतंक, कई किलोमीटर लंबा जाम, एंबुलेंस तक फंसी

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Morang mafia terrorizes Jalaun, causing traffic jams several kilometers long, even ambulances stuck

स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगाई गुहार

रिपोर्ट- अफजाल अहमद, एडिट- विजय नंदन,

जालौन जनपद में मौरंग माफियाओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। कदौरा थाना क्षेत्र के पंडौरा गांव में मौरंग के ओवरलोड ट्रकों और अवैध डंपिंग ने लोगों की ज़िंदगी मुश्किल बना दी है। सड़कों के दोनों किनारों पर मौरंग के बड़े-बड़े ढेर लगाए जाने से कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। इस जाम में एंबुलेंस सहित सैकड़ों वाहन घंटों फंसे रहते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को रोज़ाना इस अव्यवस्था के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। सुबह से लेकर देर रात तक ट्रकों की आवाजाही और सड़क किनारे किए गए डंप के चलते पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनिज और परिवहन विभाग की मिलीभगत के चलते मौरंग माफिया खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वीडियो सामने आने और शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अब तक ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए सड़क मार्ग को सुचारू कराया जाए और मौरंग माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को इस समस्या से राहत मिल सके।

मौरंग खनन के लिए ये हैं नियम और शर्तें

उत्तर प्रदेश में मौरंग (रेत) खनन के लिए सरकार ने कुछ नियम और शर्तें तय की हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। ये नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि अवैध खनन, पर्यावरण को नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

राज्य में कोई भी व्यक्ति या ठेकेदार बिना सरकारी अनुमति के मौरंग का खनन नहीं कर सकता। इसके लिए खनन विभाग से पट्टा (लीज़) लेना जरूरी होता है। खनन शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग से अनुमति (Environmental Clearance) भी लेनी होती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खनन से पर्यावरण को कोई हानि न पहुंचे।

खनन कार्य केवल निर्धारित क्षेत्रों में ही किया जा सकता है। नदी की मुख्य धारा से 500 मीटर दूर रहकर ही खनन की अनुमति होती है। वहीं, मानसून के दौरान यानी 15 जून से 15 अक्टूबर तक खनन पूरी तरह बंद रहता है। इस अवधि में खनन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाती है।

खनन के बाद मौरंग को लाने-ले जाने वाले वाहनों के लिए ई-ट्रांजिट पास या रॉयल्टी पर्ची होना जरूरी है। ओवरलोडिंग सख्त रूप से प्रतिबंधित है। हर वाहन पर GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाता है ताकि उसकी निगरानी की जा सके।

खनन करने वालों को सरकार को रॉयल्टी और ट्रांजिट फीस जमा करनी होती है। वहीं, अवैध खनन करने वालों पर जुर्माना, वाहन जब्ती और एफआईआर जैसी कार्रवाई की जाती है।

खनन स्थल पर धूल और प्रदूषण रोकने के लिए पानी का छिड़काव और हरियाली बढ़ाने की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है।

इन सब नियमों के बावजूद कई जगहों पर मौरंग माफियाओं के कारण लोगों को परेशानी होती है, क्योंकि अक्सर खनन विभाग और परिवहन विभाग की लापरवाही से ओवरलोड वाहन और अवैध खनन पर रोक नहीं लग पाती।

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