राष्ट्रीय खेल दिवस 2025 पर खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मोंडो ट्रैक का उद्घाटन किया। इस मौके पर जैवलिन स्टार नीरज चोपड़ा और अन्य खिलाड़ियों ने खुशी जताई। मांडविया ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक खेलों में महाशक्ति बनना है।
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भारत में मोंडो ट्रैक की अहमियत
- मोंडो ट्रैक एक अत्याधुनिक एथलेटिक्स ट्रैक है, जो दुनियाभर में केवल 24 देशों के पास था।
- भारत अब 25वां देश बन गया है जिसके पास यह ट्रैक है।
- लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में भी मोंडो ट्रैक का उपयोग होगा।
खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी
खेल मंत्री के निर्देश पर SAI इंजीनियरिंग विंग का गठन किया गया ताकि भारत में खेल सुविधाओं को तेजी से विकसित किया जा सके।
- मोंडो ट्रैक का निर्माण केवल चार महीनों में पूरा हुआ।
- यह भारत की तेज कार्य क्षमता और खेलों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह ट्रैक वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 से पहले खिलाड़ियों के लिए बड़ा तोहफा है।
एथलीट्स की प्रतिक्रियाएं
- नीरज चोपड़ा: “यह भारत के लिए गर्व का क्षण है।”
- सुमित अंतिल (पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट): “अब हमें विश्वस्तरीय तैयारी का अनुभव मिलेगा।”
- प्रीति पाल (एथलीट): “सबसे खुशी की बात यह है कि हम इस पर दौड़ पाएंगे।”
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भारत का खेलों में भविष्य
खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत आने वाले वर्षों में राष्ट्रमंडल खेल 2030 और ओलंपिक 2036 की मेजबानी के लिए बोली लगाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत भारत को खेलों की वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर है।