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Lucknow: AIMIM नेता के “दो दर्जन बच्चे” वाले बयान पर सियासी घमासान: यूपी के मंत्रियों ने ‘जाहिलियत’ और ‘सियासी इस्तेमाल’ का लगाया आरोप

Lucknow

Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जनसंख्या नियंत्रण और सांप्रदायिक बयानबाजी को लेकर बहस छिड़ गई है। मुरादाबाद में एक जनसभा के दौरान AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली द्वारा दिए गए “हम दो, हमारे दो दर्जन” के नारे ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शौकत अली ने मुसलमानों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए अपना और अपने परिवार का उदाहरण दिया, जिस पर यूपी सरकार के मंत्रियों ने तीखा पलटवार किया है।

“बच्चे 12 होंगे तो भीख ही मांगेंगे”: मंत्री असीम अरुण का कड़ा प्रहार

Lucknow उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण ने शौकत अली के बयान को ‘जाहिलियत’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसे शिक्षा और भविष्य की चिंता न हो। असीम अरुण ने तंज कसते हुए कहा, “अगर किसी के दो बच्चे होंगे, तो वह उन्हें अच्छी शिक्षा और जीवन दे पाएगा, लेकिन अगर संख्या दर्जनों में होगी, तो वे बच्चे भविष्य में सिर्फ भीख ही मांग पाएंगे।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे नेता मुगलों के आपराधिक कृत्यों का महिमामंडन कर समाज को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे हैं।

“अल्लाह भी उनकी मदद करता है जो अपनी मदद खुद करते हैं”: ओमप्रकाश राजभर

Lucknow कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर विपक्षी राजनीति को घेरा। उन्होंने कहा कि दशकों से मुसलमानों का केवल राजनीतिक इस्तेमाल हुआ है और उन्हें विकास से दूर रखा गया। राजभर ने शौकत अली को नसीहत देते हुए कहा कि “नेताओं को मसालेदार बातें बोलने की आदत होती है, लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह भी उन्हीं की मदद करता है जो अपनी मदद खुद करना जानते हैं।” उन्होंने यह भी साफ किया कि यूपी में AIMIM फिलहाल समाजवादी पार्टी का विकल्प नहीं बन सकती।

Lucknow “दर्जनों बच्चे पैदा कर सरकार पर बोझ डालना ठीक नहीं”: संजय निषाद

Lucknow मंत्री संजय निषाद ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि एक तरफ तो लोग दर्जनों बच्चे पैदा करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ उम्मीद करते हैं कि सरकार उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं का लाभ दे। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच से समाज में असंतुलन पैदा होता है और विकास की मुख्यधारा बाधित होती है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनता अब बांटने वाली राजनीति को समझ चुकी है और अल्पसंख्यकों का झुकाव स्पष्ट रूप से सपा की ओर है।

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