रिपोर्टर – समीम खान
लखनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। यहां डॉक्टरों, दवाइयों और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह समस्या और भी चिंताजनक हो गई है क्योंकि केंद्र में महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं है।
महिलाओं को मजबूरन आयुष चिकित्सक या आरएमए से चेकअप कराना पड़ता है, जो गंभीर स्थितियों में पर्याप्त नहीं होता। यह स्थिति कई महीनों से बनी हुई है, लेकिन अब तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्वास्थ्य केंद्र के सेटअप के अनुसार यहां 9 डॉक्टरों की नियुक्ति होनी थी, मगर फिलहाल सिर्फ 3 डॉक्टरों के भरोसे पूरा केंद्र संचालित हो रहा है। रेबीज इंजेक्शन, अन्य आवश्यक दवाइयां और सीबीसी जांच जैसी सुविधाएं न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों या झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ रही है।
लखनपुर विकासखंड की 74 से अधिक ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने उन्हें झटका दिया है। रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सकों और सुविधाओं की भारी कमी से उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।
इस विषय में जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीएस मार्को ने बताया कि चिकित्सकों की कमी पूरे जिले की समस्या है। DHS को रिक्त पदों की जानकारी दी गई है और जून माह के अंत तक नए डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही, सभी स्वास्थ्य केंद्रों में जल्द ही रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे।
वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “पूरे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य केंद्रों की यही स्थिति है। ऐसी व्यवस्था बना दी गई है कि जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री से मुलाकात तक नहीं हो पा रही है। हमने समय-समय पर पत्र लिखकर हालात सुधारने की अपील की है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।”
लखनपुर की यह स्थिति न केवल सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आम जनता अब भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है।





