खंडवा जिले में एक आदिवासी महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और निर्मम हत्या ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने न केवल राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
कांग्रेस पार्टी ने इस जघन्य अपराध की तीखी निंदा करते हुए इसे “निर्भया जैसी भयावह घटना” करार दिया है और सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
कांग्रेस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय एक जांच समिति गठित की है, जो घटनास्थल का दौरा करेगी, पीड़िता के परिजनों से मुलाकात करेगी और स्थानीय नेताओं व अधिकारियों से बातचीत कर रिपोर्ट राज्य नेतृत्व को सौंपेगी।
समिति के सदस्य:
- शोभा ओझा (पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष)
- विजयलक्ष्मी साधौ (पूर्व मंत्री)
- झूमा सोलंकी (विधायक)
कांग्रेस ने क्या कहा?
जितु पटवारी (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष) का बयान:
“यह घटना दिल्ली की निर्भया कांड से कम नहीं है। महिला के साथ गैंगरेप के बाद न केवल उसकी हत्या की गई, बल्कि उसका गर्भाशय निकालकर फेंक दिया गया। यह अमानवीयता की पराकाष्ठा है।”
पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में हर दिन औसतन 25 बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं और इसके बावजूद मुख्यमंत्री और गृहमंत्री मोहन यादव चुप्पी साधे हुए हैं।
कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के सवाल
कुनाल चौधरी (पूर्व विधायक) ने कहा:
“यह घटना राज्य में कानून व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का संकेत देती है। मुख्यमंत्री को तुरंत गृहमंत्री का पद छोड़ देना चाहिए।”
अरुण यादव (पूर्व केंद्रीय मंत्री) ने भी जताया शोक:
“यह घटना हृदयविदारक है और हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर देने वाली है। यह हर्सूद विधानसभा क्षेत्र की दुर्भाग्यपूर्ण तस्वीर है।”
घटनास्थल: कहां हुआ यह अपराध?
यह वीभत्स घटना खंडवा जिले के खालवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता को पहले अगवा किया गया, फिर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई।
कांग्रेस की मांगें
- जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी
- तेज गति से न्यायिक प्रक्रिया
- परिवार को मुआवजा और सुरक्षा
- गृहमंत्री पद से CM का इस्तीफा
सरकार की प्रतिक्रिया?
घटना को लेकर सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की चुप्पी पर विपक्ष खासा नाराज है और इसे “संवेदनहीनता” बताया जा रहा है।
निष्कर्ष: क्या बदलेगा कुछ?
यह घटना न केवल मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आदिवासी समुदाय, विशेष रूप से महिलाएं, अभी भी कितनी असुरक्षित हैं।
राजनीतिक बयानबाज़ी से इतर अब ज़रूरत है न्याय सुनिश्चित करने की – तेज कार्रवाई, दोषियों को कड़ी सजा और समाज में यह संदेश कि ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





