BY: Yoganand Shrivastva
भारत में नागरिक उड्डयन की यात्रा आज़ादी के बाद 1953 में एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के राष्ट्रीयकरण से औपचारिक रूप से शुरू हुई, इसके बाद 1990 के दशक में उदारीकरण के बाद निजी एयरलाइनों की बाढ़ आ गई; अब तक देश में लगभग 35 से 40 प्रमुख यात्री विमानन कंपनियां शुरू हो चुकी हैं, जिनमें से करीब 25 से ज्यादा एयरलाइंस बंद हो चुकी हैं, जिनमें जेट एयरवेज, किंगफिशर, एयर डेक्कन, सहारा, गो एयर, मोदीलुफ्त, दमनिया, ईस्ट वेस्ट, परफॉर्मर, ट्रूजेट जैसी कई बड़ी और छोटी कंपनियां शामिल हैं, जबकि वर्तमान में एयर इंडिया, इंडिगो, विस्तारा, अकासा एयर, स्पाइसजेट और एलायंस एयर जैसी कुछ ही एयरलाइंस सक्रिय हैं; इन कंपनियों के बंद होने के पीछे भारी घाटा, ईंधन की ऊंची कीमतें, कमजोर प्रबंधन, कर्ज का दबाव, प्रतिस्पर्धा और सरकारी नीतियों का असर जैसे कारण मुख्य रहे, वहीं इंडिगो जैसी कंपनियां मजबूत बिजनेस मॉडल और अनुशासित संचालन के कारण लगातार आगे बढ़ीं, इस तरह भारत का विमानन इतिहास उड़ानों की सफलता और असफलता—दोनों का जीवंत दस्तावेज बन चुका है।





