संवाददाता: प्रदीप बंसल
Student Guidance Program नगर के सराफ मैरिज गार्डन में शिक्षाविद् दिशा-बोध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धर्मविद् पंडित श्याम जी मानावत ने विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में समय के महत्व, संकल्प शक्ति, साधनों के सदुपयोग, माता-पिता के प्रति जिम्मेदारी और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सीमित साधनों में भी संकल्प से हासिल की जा सकती है सफलता
Student Guidance Program पंडित श्याम जी मानावत ने कहा कि जीवन में समय सबसे मूल्यवान है और विद्यार्थी अवस्था में इसका महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने समय को जीवन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विद्यार्थियों से हर क्षण का सदुपयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सफलता केवल संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करती। मजबूत संकल्प, निरंतर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के बल पर सीमित साधनों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने समय, साधन और समझ को जीवन की तीन महत्वपूर्ण देवियां बताते हुए कहा कि इनका संतुलन व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
माता-पिता के सपनों को सफलता से करें साकार
Student Guidance Program विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे माता-पिता को शर्मिंदगी महसूस हो। माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए अनेक त्याग करते हैं, इसलिए विद्यार्थियों को मेहनत और अच्छे आचरण के जरिए उनके सपनों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरु और माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी अगली पीढ़ी को अपने से आगे बढ़ते देखना है। विद्यार्थियों को उनके विश्वास और उम्मीदों को समझते हुए अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने पढ़ाई के दौरान अनुशासन बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि लापरवाही में गंवाया गया समय केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि उसके परिवार की उम्मीदों का भी नुकसान करता है।
कार्यक्रम के दौरान पंडित मानावत ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से मर्यादा, कर्तव्य, अनुशासन, त्याग, गुरु और माता-पिता के सम्मान जैसे जीवन-मूल्यों को समझाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी हैं और विद्यार्थी यदि समय रहते अपने लक्ष्य को पहचानकर मेहनत व अनुशासन के साथ आगे बढ़े तो वह सीमित संसाधनों में भी सफलता हासिल कर सकता है।
दिशा-बोध कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण और जीवन-मूल्यों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में समाजसेवी बालमुकुंद सर्राफ, रामगोपाल खंडेलवाल, पुरुषोत्तम गोयल, दीपक दुबे, रामेश्वर गोयल और दिनेशचंद्र स्वर्णकार सहित सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य, आचार्य और विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।



