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Panchayat Secretary Corruption: स्थानांतरण के बाद भी लाखों का भुगतान! सचिव पर फर्जी बिलों के जरिए 7 लाख रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप

Report: Alok Bharadwaj

Panchayat Secretary Corruption अटेर जनपद की ग्राम पंचायत सुरपुरा में पदस्थ रहे पंचायत सचिव राधाचरण शर्मा पर फर्जी बिलों के आधार पर लाखों रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी उन्होंने पुरानी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का उपयोग कर लाखों रुपये के भुगतान किए, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार जिला पंचायत भिंड द्वारा 15 जून 2026 को जारी आदेश में सचिव राधाचरण शर्मा का स्थानांतरण ग्राम पंचायत सुरपुरा से ग्राम पंचायत मधैयापुरा किया गया था। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होना था। इसके बावजूद 16 जून 2026 को “राधा रानी बिल्डिंग मैटेरियल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लायर” के नाम से लगभग 3.56 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का दावा किया जा रहा है।

कागजों में चल रही फर्मों के नाम पर भुगतान का आरोप

Panchayat Secretary Corruption मामले में आरोप है कि जिन फर्मों के नाम से भुगतान दर्शाया गया है, उनमें से एक फर्म कथित रूप से बिल पर दर्ज पते पर मौजूद ही नहीं है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित फर्मों के बिलों का उपयोग कर शासकीय राशि का भुगतान कराया गया।

आरोपों के मुताबिक 11 अगस्त 2026 को “जय माता जी कंस्ट्रक्शन” के नाम से करीब 3.30 लाख रुपये का एक और बिल लगाया गया। इस तरह दो बिलों के माध्यम से लगभग 7 लाख रुपये के भुगतान को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। मामले को लेकर जब सचिव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का दावा किया गया है। सचिव राधाचरण शर्मा की सेवा महज 6 माह शेष रही है। राजनैतिक रसूख के चलते विगत 12 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने का भी रिकॉर्ड है

शिकायत पर टालमटोल? सहायक यंत्री के जवाब पर भी उठे सवाल

Panchayat Secretary Corruption पूरा मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जब इस संबंध में सहायक यंत्री से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने शिकायतकर्ता को जनपद पंचायत में आवेदन देने की सलाह दी। इस जवाब के बाद स्थानीय लोगों और पत्रकारों के बीच यह चर्चा है कि क्या अनियमितताओं की जांच केवल औपचारिक शिकायत मिलने के बाद ही होगी, जबकि मामला सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।

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