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इंदौर-देवास रोड पर भारी जाम को लेकर हाईकोर्ट सख्त: तीन मौतों पर जनहित याचिका, NHAI से जवाब तलब

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BY: Yoganand Shrivastva

इंदौर: इंदौर-देवास मार्ग पर बीते सप्ताह लगे 40 घंटे लंबे भीषण जाम और उससे जुड़ी तीन लोगों की मौत के मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने NHAI, कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, टोल कंपनी और निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी कर 7 दिन में विस्तृत जवाब मांगा है।

NHAI ने दिया चौंकाने वाला तर्क

सोमवार को जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की खंडपीठ में हुई सुनवाई में NHAI के वकील ने यह टिप्पणी की कि “लोग आखिर इतनी जल्दी घरों से बिना कारण क्यों निकलते हैं?” कोर्ट ने इस पर सख्ती दिखाते हुए पूछा कि “क्या मंत्री और सांसदों के आने के बाद ही जाम खत्म किया गया?”


जनहित याचिका में दर्ज हुईं तीन मौतें

देवास के एडवोकेट आनंद अधिकारी द्वारा दायर याचिका में तीन व्यक्तियों की मौत को आधार बनाया गया है। याचिकाकर्ता के वकील गिरीश पटवर्धन ने बताया कि ये मौतें जाम के चलते समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण हुईं।

  • कमल पांचाल (62) – हार्ट अटैक के बाद कार में फंसे रहे, समय पर अस्पताल न पहुंच सके।
  • बलराम पटेल (55) – दिल का दौरा पड़ने के बाद ट्रैफिक में ही दम तोड़ दिया।
  • संदीप पटेल (32) – अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में दम तोड़ दिया।

कलेक्टर का आरोप: NHAI की लापरवाही

जाम की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि एनएचएआई द्वारा बनाई गई सर्विस रोड बेहद कमजोर और अधूरी है, जिससे ट्रैफिक लोड बढ़ने पर सड़क टूट गई और जाम लग गया। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन रोड के निर्माण और मांगलिया फ्लाईओवर के चलते भी ट्रैफिक का दबाव इंदौर-देवास रोड पर काफी बढ़ा है।


एनएचएआई की सफाई: मौतों का जाम से नहीं है संबंध

एनएचएआई के परियोजना निदेशक सोमेश बांझल ने दावा किया कि जिन मौतों की बात की जा रही है, वे जाम के कारण नहीं हुई हैं। एक व्यक्ति की मृत्यु शाजापुर से इंदौर आते वक्त, तो दूसरे की लसूडिया क्षेत्र में हुई थी। उन्होंने कहा कि डायवर्जन मार्ग की मरम्मत कर दी गई है और ट्रैफिक अब सामान्य रूप से चल रहा है।


हाईकोर्ट का आदेश: ठेकेदारों और टोल कंपनी को भी बनाए पक्ष

कोर्ट ने एनएचएआई को निर्देश दिया है कि निर्माण कार्य में शामिल ठेकेदारों और टोल कंपनी को भी इस मामले में पार्टी बनाया जाए और उनसे भी जवाब लिया जाए। अगली सुनवाई के लिए सभी जवाब 7 दिनों के भीतर पेश करने के आदेश दिए गए हैं।

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