🔎 मुख्य बातें:
- HDFC बैंक के CEO शशिधर जगदीशन पर लगे धोखाधड़ी के आरोपों को बैंक ने बताया “बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण”
- लीलावती किर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट ने FIR दर्ज कराने के लिए कोर्ट का सहारा लिया
- HDFC बैंक ने कहा – यह व्यक्तिगत हमले हैं, जो जानबूझकर लोन रिकवरी को बाधित करने के लिए किए जा रहे हैं
- बैंक ने कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही
🏦 HDFC बैंक ने जारी किया कड़ा बयान
HDFC बैंक ने शनिवार, 8 जून 2025 को एक आधिकारिक बयान में कहा कि वह लीलावती किर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (LKMM ट्रस्ट) द्वारा उसके CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर शशिधर जगदीशन के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।
बैंक ने कहा कि उसे इस मामले में विस्तृत कानूनी सलाह मिली है और वह अपने CEO की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। बैंक ने CEO की ईमानदारी, नेतृत्व क्षमता और प्रोफेशनल इंटीग्रिटी की सराहना की।
📌 क्या है पूरा मामला?
लीलावती ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि उसके एक पूर्व सदस्य ने शशिधर जगदीशन को ₹2.05 करोड़ की राशि दी थी, जिसका उद्देश्य ट्रस्ट के एक मौजूदा सदस्य के पिता को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना था।
इस आरोप के बाद, मुंबई की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 30 मई को बांद्रा पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। ट्रस्ट ने इसी आदेश के आधार पर कार्रवाई की मांग की।
🛑 बैंक का जोरदार खंडन
HDFC बैंक ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि ये आरोप झूठे, बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। बैंक का दावा है कि ट्रस्ट और उसके पदाधिकारी ऐसे लोगों का हिस्सा हैं जो लोन रिकवरी से बचने के लिए कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं।
बैंक ने यह भी कहा कि प्रशांत मेहता, जो कि ट्रस्ट के एक ट्रस्टी हैं, और उनके परिवार पर बैंक का काफी पुराना बकाया लोन है जिसे चुकाया नहीं गया है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट तक गई लड़ाई
HDFC बैंक का कहना है कि पिछले 20 वर्षों से वह इस बकाया लोन की वसूली के प्रयास कर रहा है। इस दौरान मेहता परिवार ने लगातार विवादित और निराधार मुकदमेबाजी का सहारा लिया, जिनमें से कई को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है।
अब जब सभी रास्ते बंद हो गए हैं, तो यह परिवार व्यक्तिगत हमलों पर उतर आया है और CEO को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
🧑⚖️ बैंक को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा
HDFC बैंक ने कहा कि उसे न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है और उसे उम्मीद है कि अदालत इन कानूनी हथकंडों और बदनामी की कोशिशों को गंभीरता से लेगी।
📈 निष्कर्ष
यह विवाद सिर्फ एक व्यक्ति या संस्था पर नहीं, बल्कि भारत की वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। HDFC बैंक जैसी संस्थाएं देश की आर्थिक नींव हैं, और ऐसी स्थिति में सत्य और न्याय की स्थापना अत्यंत आवश्यक है।





