BY: Yoganand Shrivastva
Gwalior Baba Fakir Claims मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर ग्वालियर इन दिनों अंधविश्वास, पाखंड और खुली लूट का अड्डा बन चुका है। शहर में बाबाओं, पीर और फकीरों का अवैध धंधा इस कदर परवान चढ़ रहा है कि कानून और प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आते हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में इन फर्जी बाबाओं ने अपनी 3 से 4 शाखाएं (ब्रांच) खोल रखी हैं और खुलेआम भोले-भाले लोगों की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं।
पाखंड की हदें पार: ‘गुप्त धन और वशीकरण’ के झूठे दावे

Gwalior Baba Fakir Claims इन तथाकथित बाबाओं और पीर-फकीरों के विज्ञापन और दावे इतने अजीब और खौफनाक हैं कि किसी का भी माथा ठनक जाए। शहर में सक्रिय ‘गुरु सुल्तान जी सम्राट’ और ‘गुरु मस्तान जी सम्राट’ जैसे नामधारी बाबा खुलेआम पर्चे बांटकर और बोर्ड लगाकर यह दावा कर रहे हैं कि उनके पास हर मर्ज की दवा है। इनके मुख्य पाखंडी दावों में शामिल हैं:
- वशीकरण और मनचाहा प्यार: किसी को भी अपने वश में करने, एक तरफ़ा प्यार को हासिल करने और प्यार में धोखा खाने वालों को तुरंत मिलाने का झांसा।
- गुप्त धन और कर्ज मुक्ति: रातों-रात अमीर बनाने, जमीन में गड़ा गुप्त धन निकालने और कर्ज से मुक्ति दिलाने का धोखाधड़ी भरा वादा।
- पारिवारिक और कानूनी कलश: सास-बहु के झगड़े और कोर्ट-कचहरी के मुकदमों से रातों-रात राहत दिलाने का प्रलोभन।
- बीमारियों का चमत्कारी इलाज: दवाइयों से ठीक न होने वाली गंभीर बीमारियों और लाचारी को तंत्र-मंत्र से चुटकियों में ठीक करने का दावा।
मोटा पैसा वसूल रहे फर्जी बाबा, शहर में चल रहा नेटवर्क
Gwalior Baba Fakir Claims इन ठग बाबाओं ने ग्वालियर के भीतर अपने नेटवर्क का जाल इस तरह फैला रखा है कि जगह-जगह इनकी ब्रांच संचालित हो रही हैं। अपनी समस्याओं से घिरे मजबूर और भोले-भाले लोग जब इनके जाल में फंसते हैं, तो तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के नाम पर उनसे मोटा पैसा ऐंठ लिया जाता है। हालात यह हैं कि ठगी का यह कारोबार बिना किसी डर के दिन-दहाड़े फल-फूल रहा है।

मीडिया की चेतावनी के बाद भी पुलिस की संदिग्ध चुप्पी
यह कोई पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में इस तरह के काले कारोबार का पर्दाफाश हो रहा हो। इससे पहले ‘स्वदेश न्यूज’ द्वारा इन बाबाओं और पीर-फकीरों के इस अवैध धंधे और फर्जीवाड़े के खिलाफ प्रमुखता से खबरें चलाई गई थीं, जिनमें इनकी पोल खोली गई थी।
बावजूद इसके, ग्वालियर पुलिस और प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। मीडिया द्वारा पुख्ता खुलासे करने के बाद भी पुलिस द्वारा इन पाखंडियों पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न किया जाना, स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और नीयत पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।
क्या ऐसे दावे करना उचित है?
जब अखबारों और विज्ञापनों के जरिए इन ठगों के कारनामे खुलेआम जगजाहिर हैं, तो पुलिस आखिर किस बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? क्या खाकी और इन पाखंडी बाबाओं के बीच किसी गुप्त समझौते के तहत यह सब चल रहा है? ग्वालियर की जनता आज यह सवाल पूछने पर मजबूर है कि आखिर इन कुकुरमुत्ते की तरह उगे ठगों पर प्रशासनिक बुलडोजर कब चलेगा?


