मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनके प्रयासों से विदेशी निवेश के नतीजे अब दिखने लगे हैं। हाल ही में यूरोप दौरे के बाद, जर्मनी की पाँच प्रमुख टेक कंपनियों ने मध्यप्रदेश का रुख किया है।
18 अगस्त से 22 अगस्त तक एमपी ग्लोबल स्टार्टअप एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत ये कंपनियां प्रदेश का दौरा कर रही हैं। इस पहल से व्यापार, तकनीकी नवाचार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
किन कंपनियों का दौरा
प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं:
- Tylers – स्टीवन रैनविक
- Talonik – निकोलस
- Stayex – एलेक्सजेन्ड्रा मिकीटयूक
- Q-Connect AG – मटियास प्रोग्चा
- Cloud-Squid – फिलिप रेजमूश
ये कंपनियां AI आधारित डेटा इंटीग्रेशन, IoT, वर्कफ़्लो ऑटोमेशन, डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग AI और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखती हैं।
तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी
इस दौरे का उद्देश्य सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देना
- AI, डेटा एनालिटिक्स और IT सेक्टर में श्रेष्ठ प्रैक्टिस साझा करना
- स्टार्टअप्स और उद्यमियों को ग्लोबल प्लेटफॉर्म से जोड़ना
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश में रोजगार, नवाचार और रिसर्च के नए अवसर पैदा होंगे।
इंदौर और भोपाल में कार्यक्रमों की रूपरेखा
इंदौर–उज्जैन (18-20 अगस्त)
- 18 अगस्त: इनफोबीन्स मुख्यालय में स्वागत, डिजिटल प्रोडक्ट्स पर प्रस्तुति और नेटवर्किंग डिनर।
- 19 अगस्त: इनोवेशन लैब टूर, डिजाइन थिंकिंग वर्कशॉप, B2B मीटिंग्स और सांस्कृतिक भ्रमण।
- 20 अगस्त: IIT इंदौर और उज्जैन इनक्यूबेशन सेंटर का दौरा, स्टार्टअप्स से संवाद।
भोपाल (21-22 अगस्त)
- 21 अगस्त: Invest in MP राउंडटेबल, MPIDC मुख्यालय में बैठकें और नेटवर्किंग डिनर।
- 22 अगस्त: B-Nest इनक्यूबेशन सेंटर और IM Global ऑफिस का भ्रमण, सांस्कृतिक धरोहर टूर और मीडिया ब्रीफिंग।
क्यों खास है यह दौरा?
- जर्मन कंपनियों का यह सहयोग AI, IoT और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में नई संभावनाओं का सेतु बनेगा।
- इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा।
- नई रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।
- एमपी को भारत का टेक्नोलॉजी पावरहाउस बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।
भविष्य की दिशा
यह कार्यक्रम Incubation Masters, Germany-India Innovation Corridor और MPIDC के सहयोग से आयोजित किया गया है। आगे अमेरिका, सिंगापुर और UAE जैसे देशों के साथ भी ऐसे ही तकनीकी सहयोग कार्यक्रम होंगे।
इससे मध्यप्रदेश को एक ग्लोबल टेक-हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूती मिलेगी।





