ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर कांग्रेस का जनआंदोलन: 25 जून को सामूहिक उपवास, 3 दिवसीय अभियान का ऐलान

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BY: Yoganand Shrivastva

भोपाल, ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित न होने को लेकर उपजे विवाद के बीच, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर 23 से 25 जून तक राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस अभियान के समापन पर कांग्रेस ग्वालियर में सामूहिक उपवास करेगी।

भोपाल में कांग्रेस मुख्यालय पर हुई प्रेस वार्ता में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, और विधायक फूल सिंह बरैया मौजूद रहे।


तीन दिन का आंदोलन, संविधान के मूल्यों पर केंद्रित

प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जानकारी दी कि कांग्रेस बाबा साहब अंबेडकर के योगदान और संविधान की आत्मा को आमजन तक पहुंचाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन करेगी:

  • 23 जून: कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर नागरिकों से संवाद करेंगे और संविधान की प्रस्तावना के महत्व पर चर्चा करेंगे।
  • 24 जून: मोहल्लों व बस्तियों में वंचित वर्ग के साथ सामूहिक भोजन कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाएगा।
  • 25 जून: सभी विधायक, जिला अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता ग्वालियर में एक दिन का सामूहिक उपवास रखेंगे।

“संविधान निर्माता को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम” – पटवारी का आरोप

प्रेस वार्ता में जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाते हुए कहा कि,

“संसद में डॉ. अंबेडकर के बजाय बीएन राव को संविधान निर्माता के रूप में प्रचारित करने का प्रयास हुआ। इस एजेंडे के पीछे आरएसएस की विचारधारा काम कर रही है। यह संविधान बदलने की कोशिश की जा रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि, प्रदेश में लगातार डॉ. अंबेडकर की प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया जा रहा है—अशोकनगर, दतिया, दमोह जैसे जिलों में मूर्तियाँ तोड़ी गईं, लेकिन दोषियों का अब तक कोई पता नहीं चला।


“संविधान पर सवाल उठाने वाली सोच देश विरोधी” – हरीश चौधरी

प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि,

“ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में प्रतिमा को लेकर जो विवाद खड़ा किया गया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। यह साफ है कि संविधान और बाबा साहब के योगदान को लेकर एक सोची-समझी साजिश की जा रही है। देश का हर नागरिक जानता है कि संविधान के निर्माण में डॉ. अंबेडकर की भूमिका केंद्रीय रही है।”

उन्होंने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि,

“संविधान को लेकर भ्रम फैलाने का यह अभियान नागपुर से संचालित हो रहा है।”


“वर्ग संघर्ष का एजेंडा चला रही है आरएसएस” – उमंग सिंघार का दावा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह सारा विवाद एक खास विचारधारा की देन है, जो संविधान को कमजोर करने और समाज को वर्गों में बांटने की योजना पर काम कर रही है।

“आरएसएस ने कभी किसी दलित या आदिवासी को शीर्ष नेतृत्व में नहीं रखा। यह संगठन स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं ले पाया और आज भी समाज को बांटने में लगा है।”

उन्होंने दावा किया कि यह सब 2028 की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाई जा रही है।


ग्वालियर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को लेकर उठे विवाद ने मध्यप्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इस मुद्दे को संविधान और सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए जनजागरण के जरिए भाजपा और आरएसएस पर दबाव बना रही है। अब देखना होगा कि इस आंदोलन का राजनीतिक और सामाजिक असर कितना गहरा पड़ता है।

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